आज मनुष्य धन चाहता है किन्तु पुण्य-धर्म नहीं करना चाहता – भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी
जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार, संघ शिरोमणि भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज महामुनिरा (ससंघ 35 पीछो) का मंगल प्रवास धर्मनगरी मेरठ में महती धर्म और संस्कारों की प्रभावना कर रहे हैं। मेरठ के बिरादरी में श्री महावीर जयन्ती भवन में उपस्थित विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री…

