महंगा सिलेंडर, खाली जेब—जनता को कब तक दोगे फरेब

कानपुर की सड़कों पर जो मंजर दिख रहा है, वो सरकार के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।अजीब विडंबना है—एक तरफ ये सरकार देश को ‘विश्वगुरु’ बनाने का ढोल पीट रही है, और दूसरी तरफ हरविधानसभा की माताएं-बहनें और बुजुर्ग सुबह 4 बजे से गैस एजेंसियों के बाहर खाली पेट लाइनों में सड़ रहे हैं। क्या यही वो ‘अमृत काल’ है जिसका सपना आपने दिखाया था।महंगाई ने पहले ही कमर तोड़ रखी थी, अब जनता को एक अदद सिलेंडर के लिए ‘भीख’ मांगने पर मजबूर कर दिया गया है। लोग मजदूरी छोड़कर, अपना काम-धंधा छोड़कर लाइनों में खड़े है महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सीधे पूछना चाहती हूँ जब घर का चूल्हा ही नहीं जलेगा, तो आपका ये चकाचौंध वाला विकास किस काम का? सत्ता के मद में आप इतने अंधे हो गए हैं कि आपको लाइनों में खड़े भूखे-प्यासे लोग नहीं दिख रहे? याद रखिये, ये वही जनता है जिसने आपको कुर्सी पर बिठाया था, और यही जनता आपको नीचे भी उतारेगी।

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