विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान (मध्य भारत प्रांत) के मार्गदर्शन एवं ‘सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान’ के तत्वावधान में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सरस्वती शिशु मंदिर, चिटनिस की गोठ, ग्वालियर में भव्य सामूहिक गान एवं विचार गोष्ठी का गरिमामय आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक (लोकायुक्त, ग्वालियर) श्री निरंजन शर्मा , मुख्य वक्ता सरस्वती शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री तरुण मित्तल , प्रबंध समिति सदस्य श्री धीरेंद्र सिंह भदौरिया जी एवं विद्यालय के व्यवस्थापक श्री संदीप शर्मा द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया।
तत्पश्चात प्रातः 11:00 बजे 500 से अधिक विद्यार्थियों ने एक स्वर में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गान किया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
मुख्य वक्ता श्री तरुण मित्तल जी ने अपने उद्बोधन में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी रचना बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी तथा इसे सर्वप्रथम 1886 (कांग्रेस अधिवेशन) में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गाया गया था। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की याद दिलाते हुए देश सेवा और चरित्र निर्माण के लिए प्रेरित किया।
इससे पूर्व विद्यालय के व्यवस्थापक श्री संदीप शर्मा जी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी एवं प्राचार्य श्री सुरेंद्र सिंह मौर्य जी ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया।
मंच का कुशल संचालन वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती ज्योति वर्मा द्वारा किया गया। आयोजन में आचार्यवृंद, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन ‘कल्याण मंत्र’ के साथ हुआ।

