ग्वालियर। बदलते मौसम, घटते जलस्तर और बढ़ते खाद्य संकट की चुनौतियों के बीच ग्वालियर के लिए गौरव की खबर सामने आई है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरविंद शुक्ला को देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय बरानी एवं शुष्क खेती अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की उच्चस्तरीय समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह समिति देश में वर्षा आधारित एवं शुष्क कृषि की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी।
देश के छह प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों वाली इस समिति का उद्देश्य ऐसी रणनीति तैयार करना है, जिससे कम पानी और विपरीत जलवायु परिस्थितियों में भी किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सके। समिति की सिफारिशों के आधार पर कृषि मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां तैयार करेगा।
डॉ. शुक्ला ने बताया कि समिति में डॉ. वेल मुरगन वाइस चेयरमैन तथा डॉ. जगदीश राणे सदस्य सचिव हैं। इसके अलावा डॉ. मेहता, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. यादवेंद्र सिंह और डॉ. एम.ए. शंकर सदस्य के रूप में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र लगातार नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यह समिति इस बात पर शोध करेगी कि सूखे और वर्षा आधारित क्षेत्रों में कौन-सी फसलें अधिक लाभदायक और उत्पादक साबित हो सकती हैं। साथ ही खेती की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए व्यावहारिक मॉडल तैयार किए जाएंगे।
समिति किसानों के लिए फसलों के साथ पशुपालन के बेहतर विकल्पों पर भी अध्ययन करेगी, ताकि खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके। किसानों की आय बढ़ाने, जीवन स्तर सुधारने और कृषि को टिकाऊ एवं लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना को कृषि मंत्रालय को भेजा जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि देश के शुष्क क्षेत्रों के लिए बनने वाली यह नीति आने वाले वर्षों में कृषि की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है। ग्वालियर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब यहां का नेतृत्व राष्ट्रीय कृषि नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अब सूखे खेतों की बदलेगी तस्वीर, देश की अहम कृषि समिति की कमान संभालेंगे डॉ. अरविंद शुक्ला

