आपका अभिमान बताता है, आप गुणवान नहीं हैं। – संध शिरोमणि भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज
सहारनपुर-संतों का सानिध्य अति दुर्लभ है, जहाँ एक-दो नहीं पूरे 30 पीछीधारी संतों का सानिध्य प्राप्त हो जाए उस नगर के नागरिकों के पुण्य की गणना नहीं की जा सकती। ऐसा ही सुखद संयोग धर्मनगरी सहारनपुर को प्राप्त हुआ है, परमपूज्य “जीवन है पानी की बूंद” महाकाव्य के मूल रचनाकार भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108…

