पूर्णिमा चली पुणे (महाराष्ट्र) बालिका पूर्णिमा के प्री-अडॉप्शन दत्तकग्रहण की हुई कार्यवाही

भिण्ड 24 मार्च 2026/सेवा भारती मातृछाया शिशु गृह भिण्ड में निवासरत बालिका पूर्णिमा के प्री-अडॉप्शन दत्तकग्रहण की कार्यवाही आज जिला कार्यालय महिला एवं बाल विकास में की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अंजू तोमर द्वारा बताया गया कि बालिका को पुणे महाराष्ट्र निवासी दंपति द्वारा कारा की गाइडलाइन अनुसार रिजर्व किया गया था। बालिका को रिजर्व करने के पश्चात संबंधित दंपति को समस्त मूल दस्तावेज एवं उनकी सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट के साथ भिण्ड बुलाया गया, जहां उनके दस्तावेजों, सामाजिक पृष्ठभूमि का परीक्षण किया गया। परीक्षण में उपयुक्त पाए जाने पर दत्तक ग्रहण समिति की बैठक में भावी दत्तक माता-पिता को दत्तक ग्रहण हेतु उपयुक्त पाया जाकर बालिका के प्री-एडॉप्शन दत्तकग्रहण की कार्यवाही की गई। बालिका के संभावित माता आईटी कंपनी सीनियर इंजीनियर एवं पिता का डिजिटल बुक पब्लिश का बिजनेस है, आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवार पाया गया।
बाल संरक्षण अधिकारी श्री अजय सक्सेना के द्वारा अवगत कराया गया कि संभावित माता-पिता द्वारा 2022 में कारा पर पंजीयन कराया गया था, जब 4 वर्ष बाद उनका वेटिंग क्लियर हुई और बच्ची उनके हाथों में दी गई तो उनके माता-पिता के आंखों में आंसू और खुशी को शब्दों में बयां करना संभव नहीं है। संभावित माता-पिता के साथ बालिका के संभावित नाना और मामा भी संरक्षक के तौर पर उपस्थित रहे। सभी लोग परिवार में नए सदस्य के आगमन को लेकर उत्साहित दिखे।
बाल संरक्षण अधिकारी श्री अजय सक्सेना द्वारा स्पष्ट किया गया कि माह अक्टूबर 2025 में लावारिस अवस्था में मिली बालिका को तत्काल संरक्षण हेतु जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, वहां पर चिकित्सकों की देखरेख में बालिका का उपचार हुआ स्वस्थ होने पर शरद पूर्णिमा के दिन बालिका को चिकित्सालय से डिस्चार्ज किया गया और संयोगवश शरद पूर्णिमा होने के चलते बाल कल्याण समिति द्वारा बालिका का पूर्णिमा नाम दिया गया। इसके पश्चात बालिका पूर्णिमा सेवा भारती मातृछाया शिशुग्रह में निवासरत रही। कारा के दत्तक ग्रहण के मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुसार बालिका का व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्र में विज्ञापन जारी कराया गया और एक माह के अंदर बालिका पर दावा करने के लिए आपत्ति को आमंत्रित किया गया। बालिका पर किसी भी प्रकार का दावा प्राप्त न होने पर बाल कल्याण समिति द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत बालिका को लीगल फ्री किया गया। लीगल फ्री करने के पश्चात संभावित माता-पिता द्वारा बालिका को रिज़र्व किया और प्री-एडॉप्शन दत्तकग्रहण की कार्रवाई संपन्न हुई। कार्यवाही के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अंजू तोमर, बाल संरक्षण अधिकारी श्री अजय सक्सेना, सेवा भारती मात्रा सचिव श्री संतोष कुमार गुप्ता, चिकित्सक डॉ शैलेंद्र परिहार संबंधित दत्तक माता-पिता और उनके परिजन उपस्थित रहे।
बाल संरक्षण अधिकारी श्री अजय सक्सेना द्वारा स्पष्ट किया गया की दत्तक ग्रहण का एकमात्र रास्ता कारा की गाइडलाइन अनुसार ही है अन्य किसी भी माध्यम से दत्तकग्रहण कानून अपराध है किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री गोदनामा द्वारा दत्तक ग्रहण गलत है चाहे रिलेटिव एडॉप्शन हो अथवा जरूरतमंद बालकों का एडॉप्शन, सभी प्रक्रिया कारा की गाइडलाइन अनुसार की जाती है। बच्चे गोद लेने के लिए इच्छुक माता-पिता को कारा पोर्टल पर ही पंजीयन करना है प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है लेकिन सरल और सार्थक यही प्रक्रिया है, शॉर्टकट और जल्दबाजी में कोई गलत निर्णय ना कर बैठें।

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