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पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने कहा, जिस देश में शासक और संत श्रेष्ठ होंगे, उसी देश का विकास होगा

इंदौर/दिल्ली, 04 अक्टूबर 2026। दिगम्बर जैन पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने दिल्ली के ऐतिहासिक इंडिया गेट पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए राष्ट्र और धर्म की महत्ता पर गहन प्रवचन दिए। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि
महाराज श्री ने कहा कि “वस्तु का वस्तुत्व – सम्यक का बोध बहुत गंभीर है।” वस्तु सामान्य-विशेष गुण से युक्त होती है। सामान्य के बिना विशेष और विशेष के बिना सामान्य नहीं होता है। जो व्यक्ति वस्तु के वस्तुत्व अर्थात् सामान्य-विशेष को जान लेता है, वह आनन्द के साथ जीवन जीता है।

शासक और संत की भूमिका पर महाराज श्री ने कहा कि सम्राट और आचार्य दोनों को कुशल, प्रजावत्सल, अनुशासन-प्रिय, संयमी, नैतिक, न्यायवान और श्रेष्ठ वक्ता होना चाहिए। दोनों का रूपवान और लोकप्रिय होना भी आवश्यक है। संत धर्म की रक्षा करते हैं और शासक देश की रक्षा करते हैं। जिस देश में शासक और साधु दोनों श्रेष्ठ होंगे, उस देश का विकास निश्चित है।

अंत में महाराज श्री ने आह्वान किया कि अपनी पहचान श्रेष्ठ बनाओ। जिनकी पहचान श्रेष्ठ होती है, उनका सब नाम लेना चाहते हैं। पवित्र पहचान, पवित्र विचारों से ही बनती है। सहज-जीवन, श्रेष्ठ विचार और शाकाहार ही मानव की सच्ची पहचान होनी चाहिए। देश तभी श्रेष्ठ बनेगा जब उसमें रहने वाले नागरिकों के विचार और आचरण अच्छे होंगे।

धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुवाणी का लाभ लिया।

– राजेश जैन दद्दू, प्रचार प्रमुख, इंदौर

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