इंदौर
किशनगढ़ की मार्बल नगरी ही नहीं, सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक जगत के लिए आज का दिन अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है। निर्भिमानी महादानी भामाशाह कोहीनूर के रूप में विश्व में विख्यात, आर के मार्बल,वंडर सीमेंट के पितृ पुरुष संस्थापक श्री अशोक जी पाटनी साहब के पूज्य पिताश्री, स्व. श्री कंवरलाल जी पाटनी साहब के निधन का समाचार सुनकर मन स्तब्ध है।
इस नश्वर संसार में धन कमाने वाले तो अनेक मिलते हैं, लेकिन धन के साथ-साथ संस्कारों की संपदा को संजोकर अपनी आने वाली पीढ़ियों को दान, धर्म और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करने वाले पिता विरले ही होते हैं।
पूज्य कंवरलाल जी पाटनी ऐसे ही विरले व्यक्तित्व के धनी थे।
आज पाटनी परिवार जिस महान परम्परा के लिए जाना जाता है, जिसने अपनी संपन्नता को केवल वैभव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि धर्म समाज संस्कृति , गुरु भक्ति जीव दया और मानव सेवा के साथ परोपकार, दान और समाजसेवा का माध्यम बनाया, उस परम्परा के मूल में कहीं न कहीं पूज्य पिताश्री के द्वारा दिए गए संस्कारों की अमूल्य पूंजी ही रही है।
श्री अशोक जी पाटनी साहब की सफलता के शिखर और दानवीर भामाशाह कोहीनूर के रूप में उनकी पहचान के पीछे उनके पूज्य पिता के तप, त्याग और संस्कारों की ही छाया है। क्योंकि सत्य यही है कि पिता की सबसे बड़ी विरासत धन-संपत्ति नहीं, बल्कि वे संस्कार होते हैं, जो अपनी संतान को समाज धर्म संस्कृति, गुरु भक्ति के लिए जीना सिखाते हैं।
ऐसे महान संस्कारों के जनक, समाजसेवा और सादगी की प्रतिमूर्ति पूज्य श्री कंवरलाल जी पाटनी साहब के श्रीचरणों में हमारा शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
परमात्मा से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देकर सद्गति प्रदान करें तथा श्री अशोक जी पाटनी सहित समस्त पाटनी परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति एवं असीम धैर्य प्रदान करें।आमीन
आपका भौतिक शरीर भले ही आज हमारे बीच न हो, पर आपके संस्कारों की सुगंध सदैव पाटनी परिवार और किशनगढ़ की फिजाओं में महकती रहेगी। शांति तुल्यं तपो नास्ति
डॉ जैनेंद्र जैन
राजेश जैन दद्दू
धर्म समाज प्रचारक दिगंबर जैन समाज इंदौर

