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श्री गिरनार जी – जैन धर्म के प्राणों से प्यारे महातीर्थ पर हो रहे कब्जे अन्याय के विरोध में सकल जैन समाज में आक्रोश – 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ प्रभु की मोक्ष स्थली को बचाने की हुंकार

इंदौर। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर श्री श्री 1008 नेमिनाथ प्रभु जी की मोक्ष स्थली, पावन और पवित्र महातीर्थ श्री श्री गिरनार जी की 5वीं टोंक जहां से प्रभु ने मोक्ष प्राप्त किया, उस स्थान पर हो रहे घोर अन्याय और अवैध कब्जे को लेकर भारत वर्षीय सकल जैन समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू,मंयक जैन एवं संघ प्रमुख राकेश जैन गोहिल ने कहा कि वर्ष 2005 में गुजरात उच्च न्यायालय ने सकल जैन समाज के पक्ष में निर्णय दिया था, उस निर्णय के पूरी तरह विरुद्ध कुछ असामाजिक और फर्जी संगठनों ने धोखे से जैन धर्म के महान तीर्थ गिरनार की भगवान नेमीनाथ की मोक्ष स्थली को ढक कर उस पर अवैध रूप से मंदिर स्थापित करने का महापाप किया है। वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि मजहब नहीं सिखाता की किसी धर्म की मोक्ष स्थली पर इस प्रकार जबरन कब्जा कर भारत वर्षीय सकल जैन समाज के साथ विश्वासघात किया गया है। मयंक जैन ने कहा कि
इस हरकत से समूचे भारत ने देख लिया कि अपने धर्म के अलावा दूसरों के धर्म स्थलों के प्रति कितना राग द्वेष रखा जा रहा है। जैन धर्म अहिंसा और सभी धर्मों के सम्मान में विश्वास रखता है, लेकिन हमारे प्राणों से प्यारे महातीर्थ पर इस प्रकार के कब्जे को सकल जैन समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। संघ प्रमुख राकेश जैन गोहिल ने कहा कि हमें हमारे तीर्थ को बचाने के लिए अपने प्राणों कि बाजी भी देना पड़े तो सकल जैन समाज त्यार हैं
श्री गिरनार जी महातीर्थ हमारा था हमारा है हमारा रहेगा।
सकल जैन समाज की प्रतिज्ञा है –
सकल जैन समाज अपने प्राणों से प्यारे जैन तीर्थ श्री श्री गिरनार जी को किसी भी हालत में लेकर ही रहेगा। चाहे इसके लिए कोर्ट के माध्यम से लड़ाई लड़नी पड़े या शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन करना पड़े, लेकिन सकल जैन समाज का बच्चा-बच्चा श्री श्री गिरनार जी के लिए एकजुट है।

हम केंद्र सरकार, गुजरात सरकार और न्यायालय से मांग करते हैं कि 2005 के न्यायालय के निर्णय का पालन करवाते हुए श्री गिरनार जी की 5वीं टोंक को सकल जैन समाज को सौंपा जाए और वहां से अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए।

एक ही नारा – एक ही आवाज – प्राणों से प्यारा श्री श्री गिरनार हमारा।

जय जिन शासन – जय जय नेम – जय जय गिरनार*

विरोधकर्ता – राजेश जैन दद्दू, प्रचार प्रमुख, इंदौर (सकल जैन समाज)

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