नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पर्व राज पर्युषण महापर्व पश्चात क्षमावाणी महापर्व के पावन अवसर पर धर्म और क्षमा एवं श्रंमण संस्कृति की अनेक धाराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि दिल्ली की धरा पर लगभग 70 साधु परमेष्ठी एवं आर्यिका माताजी संघ का एक साथ भव्य मंगल मिलन हुआ, जिसने दिल्ली के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
इस ऐतिहासिक मंगल मिलन में श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 श्रुत सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 अतिवीर सागर जी महाराज, आचार्य श्री 108 विनीत सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री 108 विभक्त सागर जी महाराज ससंघ का भव्य समागम हुआ। साथ ही आर्यिका माताजी संघ भी सानिध्य में उपस्थित रहा
सभी आचार्य भगवंतों ने श्रद्धालुओं को उत्तम क्षमा का वास्तविक स्वरूप समझाया। कहा कि क्षमा केवल शब्द नहीं, आत्मा की शुद्धि है। क्रोध को त्याग कर क्षमा को धारण करना ही सच्चा जैनत्व है।
विशाल पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु समाज जन उपस्थित रहे। सभी ने परस्पर “मिच्छामी दुक्कडम” कहते हुए एक-दूसरे से क्षमा याचना की और संतों का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। माताओं-बहनों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आर्यिका संघ के दर्शन कर धर्म लाभ लिया।
समाजजनों ने इसे दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा क्षमावाणी महोत्सव और संत समागम बताया। नमोस्तु शासन जयवंत हो।जय हो वितराग श्रंमण संस्कृति ।
*प्रचार प्रमुख – राजेश जैन दद्दू, इंदौर

