जसवंतनगर, इटावा-नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, जैन बाजार में भव्य श्रावक संस्कार विधि अष्टमूल गुण धारण संस्कार का अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में आयोजन संपन्न हुआ। संस्कार विधि बा. ब्र. राहुल भैया जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाष्टक व देव शास्त्र गुरु की पूजन के साथ हुआ। तत्पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं को जैन श्रावक जीवन के प्रथम एवं महत्वपूर्ण संस्कार अष्टमूल गुण धारण का महत्व बताते हुए संयम, सदाचार एवं आत्मकल्याण का संदेश दिया गया।संस्कार के अंतर्गत उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मदिरा, मांस एवं मधु (शहद) का आजीवन त्याग करने के साथ-साथ पाँच उदुम्बर फलों के त्याग का संकल्प लिया। साथ ही सभी ने सदाचार, संयम, स्वाध्याय, सेवा, माता-पिता की सेवा, प्रतिदिन देवदर्शन, सामायिक, रात्रि भोजन का त्याग तथा समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के पालन सहित दस संकल्पों को आत्मसात करने का प्रण लिया।बा. ब्र. राहुल भैया जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि अष्टमूल गुण श्रावक जीवन की आधारशिला हैं। इनका पालन व्यक्ति के जीवन में आत्मिक पवित्रता, अनुशासन, नैतिकता एवं धर्ममय जीवन का संचार करता है। उन्होंने सभी से इन संस्कारों को अपने जीवन में उतारकर परिवार एवं समाज में आदर्श स्थापित करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाओं, युवाओं एवं बच्चों ने सहभागिता कर संस्कार ग्रहण किए। अंत में सभी के उज्ज्वल, संयममय एवं धर्ममय जीवन की मंगलकामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
भव्य श्रावक संस्कार विधि अष्टमूल गुण धारण संस्कार का हुआ भव्य आयोजन

