ग्वालियर, 19 अप्रैल। भगवान महावीर निर्माण महोत्सव न्यास द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नव-सुसज्जित वर्धमान सभागार का लोकार्पण एवं भगवान महावीर चिकित्सा केंद्र (नियमित ओपीडी) का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम मुनि श्री अनुमान सागर महाराज एवं मुनि श्री वीध्रुव सागर महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त आईएएस आर.के. जैन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। डॉ. विनीता गोधा ने मंगलाचरण प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत कर दिया। संस्था के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार गंगवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। वहीं न्यास के मंत्री शरद गंगवाल ने चिकित्सा केंद्र की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह केंद्र समाज के सभी वर्गों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोरमा पांडया एवं ललित जैन भारती ने प्रभावी ढंग से किया। आभार व्यक्त संस्था के उपमंत्री धर्मेंद्र जैन द्वारा किया गया! इस अवसर पर मुख्य अतिथि आर के जैन एवं श्रीमती जया जैन का सम्मान अनिल शाह, राजेंद्र वापना, प्रशांत गंगवाल, आदित्य गंगवाल, डॉ. आदर्श दीवान, माधवी शाह, चंदा अजमेरा एवं सोनल जैन द्वारा किया गया।
समारोह में न्यास के सभी ट्रस्टीगण, जैन मिलन, महिला परिषद एवं जैन सोशल ग्रुप के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से मुनिश्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
मंदिरों के निर्माण के साथ-साथ समाज ऐसे सेवा प्रकल्पों को भी स्थापित करे
-मुनिश्री अनुमान सागर महाराज
इस अवसर पर मुनि श्री अनुमान सागर महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि धर्म केवल पूजा-अर्चना या मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सच्चा धर्म वह है जो मानवता की सेवा में समर्पित हो। उन्होंने कहा कि समाज ने भव्य मंदिरों का निर्माण कर अपनी श्रद्धा को प्रकट किया है, किंतु अब समय की आवश्यकता है कि उसी भाव से सेवा प्रकल्पों की स्थापना भी की जाए, जिससे जरूरतमंद लोगों को सीधा लाभ मिल सके।
मुनिश्री ने विशेष रूप से औषधि दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चार प्रकार के दानों में औषधि दान का विशेष स्थान है,
उन्होंने समाजजनों से आह्वान किया कि वे अपने संसाधनों और सामर्थ्य का उपयोग केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित न रखें, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें। ऐसे प्रकल्प समाज को नई दिशा देंगे और धर्म को व्यवहारिक रूप में स्थापित करेंगे।
वर्धमान सभागार का लोकार्पण, महावीर चिकित्सा केंद्र हुआ प्रारंभ

