नई दिल्ली: जैन समाज के लिए यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को भारतीय सेना की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कमांड का प्रमुख (Chief) नियुक्त किया गया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारतीय सैन्य शक्ति को एक कुशल नेतृत्व प्रदान किया है, बल्कि जैन समाज का सिर भी गर्व से ऊँचा कर दिया है।
विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन द्वारा हार्दिक बधाई
इस महान उपलब्धि पर विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने संयुक्त रूप से लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को मंगल शुभकामनाएं प्रेषित कर हार्दिक बधाई दी दद्दू ने कहा कि उनकी कार्यशेली निष्ठा, शौर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह नियुक्ति उनकी वर्षों की कठिन परिश्रम और बेदाग सेवा का परिणाम है।
देश सेवा के हर मोर्चे पर अग्रणी रहे है जैन समाज
संगठनों ने इस अवसर पर विशेष रूप से उल्लेख किया कि जैन समाज ने सदैव ‘जीओ और जीने दो’ तथा ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के सिद्धांतों के साथ-साथ ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखा है।
शौर्य और समर्पण: इतिहास गवाह है कि भामाशाह जैसे दानवीरों से लेकर आज के आधुनिक युग के सैन्य अधिकारियों तक, जैन समाज ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपनी वीरता का परिचय दिया है।
विविध क्षेत्रों में योगदान: चाहे सीमा पर शत्रुओं का मुकाबला करना हो, आर्थिक मोर्चे पर देश को सुदृढ़ बनाना हो या सामाजिक सेवा के प्रकल्प हों, जैन समाज हर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा है।
प्रेरणा का स्रोत: लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन की यह नई जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा दाईं वरदान है कि संयम और अनुशासन के मार्ग पर चलते हुए भी वीरता के उच्चतम शिखर को प्राप्त किया जा सकता है। मंयक जैन ने कहा कि “हमें पूर्ण विश्वास है कि लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन के कुशल नेतृत्व में भारतीय सेना नई ऊंचाइयों को छुएगी और मां भारती की सीमाएं और अधिक सुरक्षित होंगी। संपूर्ण जैन समाज एवं इंदौर जैन समाज के वरिष्ठ जन डॉ जैनेन्द्र जैन, अमित कासलीवाल हंसमुख गांधी टीके वेद नरेंद्र वेद आजाद जैन एवं श्रीमती पुष्पा कासलीवाल रेखा जैन श्रीफल श्रीमती मुक्ता जैन ने उनके उज्जवल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना करते है।”
— विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ
भारतीय सेना की सबसे बड़ी कमांड की कमान अब जैन समाज के गौरव के हाथों में

