डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना व स्वावलंबी गौशाला नीति से दोगुनी होगी किसानों की आय

भिण्ड 24 फरवरी 2026/मध्य प्रदेश सरकार ने 2025-26 के बजट में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और स्वावलंबी गौशाला नीति प्रमुख घोषणाएं हैं, जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखती हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना
यह योजना मध्य प्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का सपना लेकर आई है। पशुपालकों को डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी, जिसमें प्रति यूनिट 25 दुधारू पशु (सभी गाय या सभी भैंस) शामिल हैं। एक हितग्राही अधिकतम 8 यूनिट (कुल 200 पशु) तक स्थापित कर सकता है।
यूनिट की लागत ₹36 लाख से ₹42 लाख तक है, जो बैंक लोन और सब्सिडी से पूरी होती है। SC/ST वर्ग को कुल लागत का 33% अनुदान, जबकि अन्य वर्गों को 25% अनुदान मिलेगा। पात्रता में मध्य प्रदेश निवासी होना और कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है। योजना का लाभ लेने से पहले सरकारी संस्थान से डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण अनिवार्य है।
बजट 2025-26 के प्रमुख प्रावधान
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने पेश किए बजट में गौ-संवर्धन एवं पशु संवर्धन के लिए ₹620.50 करोड़ आवंटित किए। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना को ₹250 करोड़ मिले, जबकि डेयरी विकास के लिए कुल ₹50 करोड़ का प्रावधान है। गौशालाओं में प्रति गाय का आहार भत्ता ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रतिदिन किया गया।
ये कदम दूध उत्पादन बढ़ाने और दुग्ध संकलन पर ₹5 प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि देकर किसानों की आय दोगुनी करने पर केंद्रित हैं। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ अनुबंध की मंजूरी मिली।
स्वावलंबी गौशाला नीति 2025
आवारा पशुओं की समस्या हल करने और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली यह नीति गोकुल धाम जैसी बड़ी इकाइयों पर फोकस करती है। कम से कम 5,000 पशुओं की क्षमता वाली गौशालाओं के लिए सरकार 125-130 एकड़ भूमि देगी। इनमें 5 एकड़ भूमि दूध प्रसंस्करण और जैविक खाद उत्पादन जैसे व्यावसायिक कार्यों के लिए आरक्षित होगी। यह नीति गौशालाओं को घाटे से उबारकर लाभकारी बनाएगी, जिससे प्रदेश की 3,000 से अधिक गौशालाओं में 4.75 लाख पशुओं का बेहतर संरक्षण हो सकेगा।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम अब ‘पशुपालन, डेयरी एवं गौ-संवर्धन विभाग’ हो गया। दुग्ध समितियों की संख्या 9,000 से बढ़ाकर 26,000 करने का लक्ष्य है। बजट में कुल पशुपालन और डेयरी विकास के लिए ₹555 करोड़ का प्रावधान किया गया, जो ग्रामीण रोजगार बढ़ाएगा।

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