ग्वालियर 22 अप्रैल 2026/ उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर में म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा किशोर सशक्तिकरण विषयक “उड़ान” एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए उच्च न्यायलय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने कहा कि 13 से 18 वर्ष की आयु आकांक्षाओं की उड़ान और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण समय होता है। इस उम्र में युवा बड़े सपने देखते हैं और यदि उन्हें समय पर समुचित कैरियर काउंसिलिंग व मार्गदर्शन मिल जाए, तो वे अपनी आकांक्षाओं को सही दिशा दे सकते हैं।
न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने कहा कि यही वह उम्र है, जब एक विद्यार्थी डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसा वैज्ञानिक बनने, एम.एस. धोनी जैसा खिलाड़ी बनने, पी.वी. सिंधु जैसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने अथवा आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखता है। ऐसे सपने केवल कल्पना नहीं, बल्कि लक्ष्य होते हैं, जिन्हें सही दिशा, परिश्रम और मार्गदर्शन से साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किशोरों की आकांक्षाओं को पहचानकर उन्हें सकारात्मक दिशा देना समाज और संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।
न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से एकाग्रता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर प्रकाश डाला तथा बुलिंग को अनुचित व्यवहार बताते हुए इससे दूर रहने की सीख दी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, पठन-पाठन की आदत विकसित करने तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया।
उल्लेखनीय है कि यह कार्यशाला न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, म.प्र. उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर की प्रेरणा तथा न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं कार्यपालक अध्यक्ष, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर की पहल से आयोजित की गई।
कार्यक्रम में डॉ. नीलम टंडन ने छात्र-छात्राओं को वित्तीय प्रबंधन और बचत की महत्ता पर जानकारी दी। सदस्य सचिव कु. सुमन श्रीवास्तव ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका पर प्रकाश डाला। यूनीसेफ कंसल्टेंट अमरजीत सिंह ने बाल सुरक्षा एवं पॉक्सो अधिनियम संबंधी जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुश्री विदिता डागर ने डिजिटल सुरक्षा और साइबर बुलिंग के विषय में विद्यार्थियों को जागरूक किया।
डॉ. धर्मेन्द्र रिछारिया ने स्वास्थ्य, पोषण, नींद, जल सेवन तथा मानसिक एवं शारीरिक ऊर्जा के महत्व पर जानकारी देते हुए संतुलित दिनचर्या अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति श्री अमित सेठ, न्यायमूर्ति श्री पुष्पेन्द्र यादव, न्यायमूर्ति श्री आनंद सिंह बहरावत, न्यायमूर्ति श्री राजेश कुमार गुप्ता सहित उच्च न्यायालय एवं न्यायिक प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
किशोरावस्था आकांक्षाओं की उड़ान का समय, सही मार्गदर्शन से मिलती है सफलता की दिशा–न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक

