दुर्गुणों के नाश एवं सद्गुणों की प्राप्ति के लिए”धर्म” आवश्यक है- भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्श सागर की महामुनिराज
बुढ़ाना समाज उमड़ा भावलिंगी संत की अगवानी में ! धर्म की शरण में आने से हमें वह प्राप्त होता है जो संसार में कहीं भी प्राप्त नहीं होता 1 । धर्म हमें वह देता है जो वचनों से नहीं कहा जा सकता, वह अनिर्वचनीय होता है। धर्म पालन करने के फल लोक में सर्वोत्कृष्ट होते…

