सामाजिक संसद का अध्यक्ष चुनने का अधिकार सिर्फ सांसदों को
इंदौर- जैन समाज को सदैव नैतिक सुचिता का प्रतीक माना गया है और यह समाज कभी संख्या से नहीं चरित्र से पहचान गया है, लेकिन संप्रति एक कड़वा एवं चिंताजनक सत्य यह है कि जिस विकृति को हम राजनीति में देखते हैं और कोसते हैं वही विकृति जैन समाज में भी दिखाई देने लगी है।…

