इटावा। गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता, लोकतंत्र सेनानी, उप्र सर्वोदय मंडल के पूर्व अध्यक्ष व सर्व सेवा संघ के ट्रस्टी राम धीरज भाई बनारस से इटावा गांधी आश्रम पहुंचे। वहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि खादी और ग्रामोद्योग संस्थाएं बहुत आर्थिक संकट में है। सरकार खादी संस्थाओं का छूट का कई करोड़ रूपया सालों से रोके हुए।सरकार संस्थाओं के कामकाज के लिए दो दशक पहले क़र्ज़ दिया था। संस्थाओं ने मूलधन से अधिक ब्याज दे दिया है। फिर भी सरकार ने उनकी संपत्तियों को बंधक बना रखा है। छूट की रकम न देने और ब्याज पर ब्याज के कारण संस्थाएं पामाल हो रही है।अपने कार्यकर्ताओं का वेतन, फंड और पेंशन भी नहीं दे पा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस उत्पीड़न और मनमाने रवैये से गांधी आश्रम के कार्यकर्ताओं में बहुत आक्रोश है। सरकार ने खादी के रेडीमेड कपड़ों पर और ग्रामोद्योग सामानों पर जीएसटी लगा दिया है जो पहले कभी नहीं था। इसके चलते खादी और ग्रामोद्योग में रोज़गार घट रहा है किसके परिणाम स्वरूप संस्थाएं घाटे में जा रही हैं।
राम धीरज भाई ने खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी संस्थाओं पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए कहा कि जो संस्थाएं गांव में लोगों को रोज़गार दे रही थीं वह अब बंद हो रहीं हैं। बेरोज़गारी बढ़ रही है जिसके कारण बड़े स्तर पर पलायन हो रहा है। इसलिए कार्यकर्ता आंदोलन के रास्ते पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
राम धीरज भाई ने कहा कि जो चरखा आज़ादी का हथियार था, खादी वस्त्र आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानियों की वर्दी थी और खादी-ग्रामोद्योगी संस्थाएं आज़ादी के दीवानों का खास स्थान हुआ करतीं थीं। वह सरकार की ग़लत नीतियों के कारण लाखों लोगों को रोजगार देने वाली संस्थाओं को आज सरकार ने पंगु बना दिया है।उन्होंने बहुत दुखी होकर कहा कि जिस खादी ने मैनचेस्टर की मिलों की चूलें दिला दी, देश को ग़ुलामी से मुक्त कराया वह खादी आज खुद की सरकार की गुलाम होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यह बात खादी और ग्रामोद्योग कार्यकर्ताओं को बहुत नागवार गुज़र रही है।
इसलिए कार्यकर्ता कह रहे हैं कि अगर सरकार ने क़र्ज़ और जीएसटी माफ़ नहीं किया तथा हमारी संपत्तियों को खादी कमीशन ने मुक्त नहीं किया तो हम गांधी टोपी पहनकर चरखा लेकर सड़कों पर उतरेंगे और हम सत्याग्रह करेंगे। इसके अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं है। हम गांधी की बनाई संस्थाओं को बर्बाद नहीं होने देंगे। यह संस्थाएं केवल कपड़ा या साबुन-तेल बेचने वाली संस्थाएं नहीं है यह आज़ादी का इतिहास, स्मारक और विरासत हैं।राम धीरज भाई ने बताया कि अगर ज़रूरत हुई तो देश भर के लाखों गांधीवादी कार्यकर्ता चरखा लेकर जंतर-मंतर और संसद पर भी पहुंचेंगे।

