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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि विश्वविद्यालय की दो नवाचार इकाइयों का किया लोकार्पण

ग्वालियर। किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और वैज्ञानिक कृषि को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वविद्यालय परिसर में विकसित समन्वित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति (Multi-tier Farming System) की अत्याधुनिक इकाइयों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
लोकार्पण के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वविद्यालय में हो रहे अनुसंधान, नवाचार और किसान हितैषी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय प्रदेश में कृषि नवाचारों का मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां विकसित मॉडल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ कम लागत में अधिक उत्पादन और पूरे वर्ष आय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए ये मॉडल केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों के लिए व्यवहारिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किए गए हैं। यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर किसान अपने खेतों में इन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकेंगे, लागत कम कर सकेंगे और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित समन्वित कृषि प्रणाली इकाई में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया गया है। इस मॉडल की विशेषता यह है कि एक गतिविधि से निकलने वाला अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए संसाधन बनता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, संसाधनों का समुचित उपयोग होता है और किसानों को पूरे वर्ष आय के अनेक स्रोत प्राप्त होते हैं।
वहीं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई में एक ही खेत में विभिन्न ऊंचाई वाली फसलों का वैज्ञानिक संयोजन विकसित किया गया है। इस तकनीक से भूमि, जल, पोषक तत्वों और सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग संभव होता है। किसान एक ही खेत से वर्षभर विविध फसलों का उत्पादन लेकर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।
कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नई तकनीकों का विकास करना नहीं, बल्कि उन्हें किसानों के खेतों तक पहुंचाकर व्यवहार में लाना है। इन दोनों इकाइयों को जीवंत प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि किसान इन्हें देखकर सीख सकें और अपने खेतों में अपनाकर आत्मनिर्भर एवं लाभकारी कृषि की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये नवाचार प्रदेश के कृषि विकास में नई दिशा प्रदान करेंगे और किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे।

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