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मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य हुई समीक्षा बैठक

ग्वालियर – कलेक्टर ग्वालियर श्रीमती रुचिका सिंह चौहान के मार्गदर्शन में ग्वालियर जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला ग्वालियर डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को वीसी में मिशन संचालक (एन.एच.एम. ) मध्य प्रदेश द्वारा निर्देश दिए गए कि मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर कम करने हेतु बेहतर काम किया जाये, इस हेतु जिला स्तर पर सम्बंधित अधिकारियों की बैठक जिला स्वास्थ्य अधिकारी -1 डॉ. दीपाली माथुर ने गुरुवार को सीएमएचओ कार्यालय में बैठक ली गई।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी-1 डॉ दीपाली माथुर ने बताया कि मिशन संचालक एन एच एम मध्य प्रदेश के निर्देशानुसार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला ग्वालियर डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में जिला स्तर पर मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से किशोरी एवं गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिले इस हेतु समीक्षा बैठक ली गई और बारीकी से सुमन हेल्प डेस्क की समीक्षा की गई और सम्बंधित अधिकारियों/ कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए
बैठक में डीएचओ 1 – डॉ. दीपाली माथुर , सीपीएचसी कंसल्टेंट , सुमन हेल्प डेस्क टीम , जिला एम एण्ड ई.ओ.
,डीपीएचएनओ उपस्थित रहे।

बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदु एवं निर्देश:-
1. एचआरपी प्रबंधन: उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की ट्रैकिंग को सुदृढ़ करना एवं समय पर फॉलो-अप सुनिश्चित करना।
2. बर्थ वेटिंग रूम: पात्र लाभार्थियों के लिए बर्थ वेटिंग रूम में भर्ती एवं उनके अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करना।
3. एचआरपी हॉट पॉकेट: लक्षित हस्तक्षेप हेतु ब्लॉक स्तर पर एचआरपी हॉट पॉकेट्स की पहचान करना।
4. सेवाओं की उपलब्धता: ब्लॉक-वार सेवाओं एवं संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा कर कमियों को दूर करना।
5. सीएचओ को सहयोग: बेहतर सेवा प्रदायगी हेतु सीएचओ का हैंड-होल्डिंग एवं सहायक पर्यवेक्षण करना।
6. एमडीएसआर: समय पर एवं सटीक मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया रिपोर्टिंग तथा निष्कर्षों पर फॉलो-अप कार्यवाही सुनिश्चित करना।
7. रक्त की उपलब्धता: रक्त की अनुपलब्धता की स्थिति में बैकअप योजना तैयार करना, जिसमें नजदीकी ब्लड बैंक एवं रेफरल सुविधाओं से समय पर समन्वय शामिल हो।
8. निगरानी: संबंधित अधिकारियों द्वारा उपरोक्त सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी एवं रिपोर्टिंग।
सभी संबंधितों को उपरोक्त गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन एवं सघन निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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