ग्वालियर 23 फरवरी 2026/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। किसानों के अथक परिश्रम से ही हमारे बाजार गुलजार है। हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह वर्ष प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित और समग्र कल्याण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह वर्ष ‘खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक’ की पूरी मूल्य संवर्धन श्रृंखला को एक सूत्र में जोड़ेगा। इस वर्ष हम क़ृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और इनमें वैल्यू एडिशन के लिए अधिकाधिक रोजगार आधारित उद्योगों के विकास, उन्नत किस्म के बीजोत्पादन, पशुपालन, दुग्धोत्पादन, मत्स्योत्पादन में वृद्धि सहित हर वो कदम उठाएंगे, जिनसे खेती और अन्नदाताओं का विकास हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में हो रहे ‘कृषि मंथन एवं कृषि प्रौद्योगिकी मेला 2026’ को सोमवार को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया।
प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना संबंधी कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में तेज़ी से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार प्रदेश में औषधीय और मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ाने के सभी प्रयास कर रही है। सरकार जल्द ही कृषि उत्पादन निर्यात नीति लाने वाली है। साथ ही कृषि में शोध कार्य भी बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी और फल-फूलों की खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कृषि मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह हमें किसानो के कल्याण के लिये प्रभावी और कारगर कदम उठाने में सहायक होगा। ‘कृषि मंथन’ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और राज्य शासन के कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” की थीम पर हो रहा कृषि मंथन निश्चित ही किसानों को खेती में जरूरी सुधार और बदलाव लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करने पर फोकस कर रही है। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी। हम कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्र में भी नई सोच से आगे बढ़ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रही है। इस मंथन में देश के विभिन्न कृषि संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक विचार मंथन कर नई तकनीकों के विकास की राह प्रशस्त करेंगे।
वीडियो काँफ्रेंसिंग में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग श्री निशांत वरवड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क श्री मनीष सिंह ने भोपाल से सहभागिता की। यूनिवर्सिटी परिसर में हो रहे इस कृषि मंथन में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलगुरू प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार शुक्ला, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डा. ब्रजेन्द्र सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़, कर्नाटक के कुलपति डॉ. पी.एल पाटिल, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों से आये वैज्ञानिक, आईसीएआर के पदाधिकारी सहित कृषि अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत करते हुए कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय कृषि, शिक्षा और अनुसंधान में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
कौशल और मूल्य संवर्धन पर जोर
परिचर्चा के दौरान डॉ. संजीव कुमार ने सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर भंडारण, परिवहन और बाजार सुविधाओं को स्मार्ट तकनीक से जोड़ने का सुझाव दिया। डॉ. अशोक तिवारी ने हाट-बाजार विकसित करने के साथ-साथ पंचायत स्तर पर एग्रीगेटर व्यवस्था और वेयरहाउस व फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का सुझाव दिया। इसके लिये सरकार द्वारा योजनायें संचालित की जा रही हैं।
वैज्ञानिक श्रीनिवासन ने स्टार्टअप के लिए स्किल डेवलपमेंट को अनिवार्य बताते हुए विश्वविद्यालय स्तर से ही उद्यमिता प्रशिक्षण की आवश्यकता जताई। सोयाबीन अनुसंधान केंद्र के डॉ. कुंअर हरेन्द्र सिंह ने कहा कि सोयाबीन को केवल तेल फसल के रूप में नहीं, बल्कि 40 प्रतिशत प्रोटीन वाली फसल के रूप में प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कृषि मंथन में तकनीक व नीति सुधार पर जोर
कृषि मंथन के दौरान डॉ. के. श्रीनिवास ने ग्रामीण स्टार्टअप और युवा उद्यमियों के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि नवाचार, वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन से ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित उद्योगों की ओर आकर्षित किया जा सकता है। डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिये प्रयास जारी रखने पर जोर दिया। डॉ. सिवारामन एन. ने भविष्य की कृषि नीति के निर्माण में संस्थागत समन्वय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। हाईटेक बागवानी सत्र में विशेषज्ञों ने संरक्षित खेती, वर्टिकल फार्मिंग और कट फ्लावर के निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही डिजिटल कृषि और मशीनीकरण को भविष्य की दिशा बताया।
बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं
भारत सरकार के अतिरिक्त आयुक्त बागवानी डॉ. नवीन पटले ने कहा कि मध्यप्रदेश में जलवायु विविधता और विस्तृत भू-क्षेत्र के कारण हाईटेक हॉर्टिकल्चर के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, टिश्यू कल्चर एवं उन्नत पौध सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डॉ. गौरव शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, आरएलबीसीएयू, झांसी ने बताया कि मध्यप्रदेश में कटे हुए फूलों की खेती घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक निर्यात के लिए अत्यंत संभावनाशील क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, कोल्ड चेन और बेहतर विपणन रणनीति से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
डॉ. प्रदीप कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर-काजरी, जोधपुर ने संरक्षित सब्जी उत्पादन और ऊर्ध्वाधर खेती (वर्टिकल फार्मिंग) में नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने सीमित भूमि में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए आधुनिक संरचनाओं और नियंत्रित वातावरण तकनीक को उपयोगी बताया।
डॉ. अभिनव दुबे, वैज्ञानिक, आईसीएआर-सीआईपीएफटी, लुधियाना ने फलों एवं सब्जियों में कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने हेतु उन्नत भंडारण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विद्यार्थियों एवं कृषि उद्यमियों ने अनुभव साझा किए
कृषि मंथन में विकसित भारत कृषि टैकाथॉन का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों एवं उद्यमियों ने अपने अपने आइडिया साझा करते हुए ऑनस्क्रीन प्रेजेन्टेशन दिया । तकरीबन 20 से अधिक लोगों ने अपने विचारों को रखा । इन विचार के आधार पर भविष्य के व्यापार की नींव गढी जाएगी। साथ ही व्यापार स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास किये जाएगे। टैकाथॉन का आयोजन इन्क्यूवेशन सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. वाय. डी मिश्रा के निर्देशन में हुआ।

