आदित्य वर्ल्ड सिटी जैन मंदिर परिसर में मारपीट की घटना समाज में आक्रोश

गाजियाबाद/उत्तरप्रदेश
लालकुआं क्षेत्र स्थित आदित्य वर्ल्ड सिटी के जैन मंदिर परिसर में एक अत्यंत पीड़ादायक एवं चिंताजनक घटना सामने आई है। आरोप है कि मंदिर समिति से जुड़े अध्यक्ष नितिन जैन, मंत्री विवेक जैन, उमंग जैन एवं अमित जैन द्वारा ऋषभ जैन के साथ मारपीट की गई तथा उन पर जानलेवा हमला किया गया।
इस घटना में ऋषभ जैन को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद थाना वेव सिटी पुलिस द्वारा उन्हें मेडिकल उपचार हेतु अस्पताल भेजा गया। जिस स्थान पर अहिंसा, क्षमा और संयम का संदेश दिया जाता है, उसी मंदिर परिसर में इस प्रकार की हिंसक घटना ने पूरे जैन समाज को आहत किया है। समाज का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि जैन धर्म की मूल भावना — अहिंसा — पर सीधा आघात है।
पीड़ित ऋषभ जैन ने थाने जाकर घटना की प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज कराई है, लेकिन आरोप है कि उन पर किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपनी शिकायत वापस ले लें। पीड़ित का यह भी कहना है कि मंदिर समिति द्वारा समाज के सामने किसी प्रकार का हिसाब-किताब प्रस्तुत नहीं किया जाता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान मंदिर समिति में एक ही परिवार के सगे संबंधियों सहित लगभग पांच लोग शामिल हैं। समिति का चुनाव वर्ष 2018 के बाद से नहीं कराया गया है। समिति में तीन सदस्य आपस में पति-पत्नी और मां के रिश्ते में बताए जा रहे हैं। पूर्व में भी समिति पर मनमानी, समाज से टकराव और आपसी विवाद के आरोप लगते रहे हैं। यह भी बताया जा रहा है कि समिति के कुछ पदाधिकारी पहले भी मंदिर परिसर में विवाद और मारपीट की घटनाओं में शामिल रहे हैं।
घटना के संबंध में बताया गया कि 21 दिसंबर, रविवार 2025 को मंदिर परिसर के अंदर एक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर मंदिर के अंदर लगाए जाने तथा शुद्धता-अशुद्धता के विषय को लेकर ऋषभ जैन और समिति के लोगों के बीच विवाद हुआ, जो बाद में झगड़े और मारपीट में बदल गया। इस दौरान समिति से जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी चोटें आने की बात कही जा रही है।
समाज के लोगों का मानना है कि इतनी छोटी आबादी में यदि जैन समाज आपस में ही संघर्ष करता रहेगा, तो यह समाज की एकता और अस्तित्व दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आवश्यकता है कि समग्र समाज आगे आए, ऐसे मामलों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाए तथा संवैधानिक एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से मंदिर समिति के चुनाव कराकर समाज की सहभागिता से नई समिति का गठन किया जाए।
समाज के प्रबुद्धजनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने, सत्य के साथ खड़े रहने और न्याय सुनिश्चित करने में सहयोग करने की अपील की है।

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