चेहरे नहीं, चरित्र बदलने से बन जाता है आत्मा-परमात्मा- भावलिगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज
मुजफ्फरनगर- जीवन में भगवान की जरूरत, आवश्यकता और महता क्या है? हम जानते हैं हमारे जीवन में सांसारिक प्रदायों की महत्ता क्या है। हम जानते हैं कि हमारे जीवन में धन की भोजन की, पिता-माला- भाई आदि रिश्तों की महत्ता क्या है। हमें जीवन में धन की महत्ता आती है इसीलिए आप धन कमाने के…

