असमर्थ लोग ही भगवान की पूजा करते हैं, जो समर्थ होते हैं वे भगवान होते हैं – पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव
दिल्ली, 09 अक्टूबर 2026। दिगम्बर जैन श्रमण-संस्कृति के उत्कृष्ट उन्नायक पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने महती धर्मसभा में सम्बोधन करते हुए भक्ति, भाव विशुद्धि और कषाय त्याग का अत्यंत गहन संदेश दिया। भक्ति और भाव – गुरुदेव ने कहा कि “असमर्थ लोग ही भगवान की पूजा करते हैं, जो समर्थ होते हैं वे…

