युवा और श्रम का पुनर्जागरण : गुरुजी की दूरदृष्टि से आत्मनिर्भर भारत की दिशा
शरद पूर्णिमा, वह पावन रात्रि जब सम्पूर्ण सृष्टि चंद्रमा की पूर्ण आभा में स्नान करती है, ज्ञान, तप और सृजन की त्रिवेणी एकाकार होती है। यह वही शुभ तिथि है जब संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज जैसे महामानवों ने इस धरती पर अवतार लिया – ताकि…

