संस्कृति, सभ्यता और सेवा परोपकार, जीव दया का संवाहक जैन धर्म : संगोष्ठी के तीसरे सत्र में आचार्य श्री ने प्राकृत को प्रकृति की भाषा बताई
इंदौर। आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ससंघ के परम सानिध्य में त्रिदिवसीय संगोष्ठी में श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ द्वारा आयोजित कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा” के तृतीय सत्र का शुभारंभ आज सोमवार को हुआ। इस आयोजन में मुख्य वक्ता डॉ.नलिन के शास्त्री नई दिल्ली ने अपना…

