ग्वालियर 24 जनवरी 2026/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में ग्वालियर व्यापार मेला में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ग्वालियर की प्रदर्शनी “जन- जागृति मेला प्रदर्शनी 2026” लगाई गई है। उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने विधिक जागरूकता के उद्देश्य से लगाई गई इस प्रदर्शनी का शुक्रवार सायंकाल दीप प्रज्ज्वलन कर उदघाटन किया। साथ ही प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के न्यायमूर्ति श्री जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति श्री मिलिंद रमेश फड़के, न्यायमूर्ति श्री हृदेश, न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति श्री अमित सेठ, न्यायमूर्ति श्री पुष्पेन्द्र यादव, न्यायमूर्ति श्री आनंद सिंह बहरावत एवं प्रधान जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री ललित किशोर सहित ज़िला न्यायालय ग्वालियर के न्यायाधीशगण उपस्थित रहे।
इस प्रदर्शनी में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं की जानकारी,नालसा एप, देश में कार्यरत विधिक सेवा संस्थानों की संरचना व नालसा टोल फ्री नंबर 15100 व दैनिक उपयोगी कानूनी प्रावधानों की जानकारी से संबधित फ्लेक्स लगाये गये हैं, साथ ही विभिन्न योजनाओं को प्रोजेक्टर के माध्यम से भी दिखाया जा रहा है। विधिक जागरूकता प्रदर्शनी में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण व अन्य महत्वपूर्ण विषयों को भी दिखाया गया है।विधिक जागरुकता प्रदर्शनी का अवलोकन करने आने वाले आगन्तुकों को विभिन्न योजनाओं के पंपलेट भी वितरित किये जा रहे हैं।
प्रदर्शनी का विज़न एवं मिशन
यह प्रदर्शनी कमजोर और वंचित वर्गों को निष्पक्ष और सार्थक न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक समावेशी कानूनी प्रणाली को बढ़ावा देने एवं विधिक जागरूकता के उद्देश्य से लगाई गई है। क़ानूनी तौर पर समाज के कमजोर और बहिष्कृत समूहों को सशक्त करने के लिए प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान करना, कानूनी साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन द्वारा कानूनी तौर पर उपलब्ध लाभ और हकदार लाभार्थियों के बीच की खाई को कम करने के लिये प्रदर्शनी में उपयोगी जानकारी प्रदर्शित की गई है।
लोक अदालत की प्रणाली और अन्य वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को मजबूत करना, जिससे कि समाज के गरीब और वंचित वर्गों को विवादों का अनौपचारिक, त्वरित और सुलभ समाधान प्रदान किया जा सके और न्यायपालिका पर अधिनिर्णय के अधिक बोझ को कम किया जा सके।

