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24 घण्टे में एक कार्य स्वार्य रहित होकर अवश्य करें, जीवन संवर जायेगा- भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज

जीवन है पानी की बूंद” महाकाव्य के मूल रचनाकार राष्ट्र‌योगी संघ शिरोमणि भावलिंगी संत दिगम्बर श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पीछी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान में पधारे।
27 अक्टूबर को धर्मनगरी सहारनपुर से चातुर्मास के पश्चात पद‌विहार करते हुए 31 अक्टूबर को आचार्य गुरुवर चतुर्विध संघ सहित रामपुर मनिहारान में पधारे। प्रातः बेला में सकल जैन समाज के साथ सम्पूर्ण नगरवासी जनों ने आचार्य संघ की भव्य मंगल आगवानी करते हुए जैन मंदिर के दर्शन कराते हुए कन्या विद्यालय के प्रांगण में पदार्पण कराया।
स्थानीय जैन समाज एवं आगन्तुक भक्तों से भरी विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुआचार्य भगवन् ने कहा बन्धुओं ! आज आपको मन
वन्चन और यह देह प्राप्त हुयी है यह आपके ही पूर्वोपार्जित पुण्योदय का फल है। आपको आज धन-वैभव प्राप्त हुआ वह भी पुष्य का फल है याद रखो-पुण्य के फल से आपको सांसारिक धन संपदा प्राप्त हो सकती है किन्तु यदि “आपको धर्म चाहिए तो वह मात्र पुण्य से प्राप्त नहीं होगा, धर्म यदि चाहिए तो वह पुष्य के साथ-साथ पुरुषार्य से प्राप्त होगा।
01 नवम्बर को आचार्यश्री ने अपने मंगल उपदेश में कहा- आज हर मानव धर्म की खोज कर रहा है, धर्म है लिए मन्दिर-मन्दिर घूम रहा है किन्तु प्रभु तीर्थंकर महावीर स्वामी कहते हैं “धर्म कहीं बाहर नहीं मिलेगा धर्म अपनी ही आत्मा में सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्र के रूप में मिलता है। लेकिन ध्यान रहे वह धर्म सच्चे देव-शास्त्र गुरु के आश्रय के बिना भी कभी प्राप्त नहीं होता। इसीलिए सच्चे धर्माभिलाषी मानव को सच्चे देव-शास्त्र गुरु की शरण में रहकर समीचीन रत्नत्रय धर्म की प्राप्ति करना चाहिए।
आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज का विशाल चतुर्विध संघ तीन दिन तक रामपुर मनिहारान के श्री दिगम्बर जैन मंदिर में प्रवास करते हुए नगरवालियों को धर्मलाभ प्रदान कर रहे हैं। नगर के इतिहास में प्रथम बार इतना विशाल न्पतु‌र्विध का पदार्पण हुआ है। जैन-अजैन सभी श्रद्धालु गण प्रातः, मध्याहन, संध्या और रात्रि बैला में संघ की सेवा करते हुये अपने जन्म और जीवन को सफल कर रहे हैं।
02 नवम्बर, रविवार को धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा. अपना सम्पूर्ण जीवन स्वार्थ में ही बिता देता है, कोई बिरला ही स्वार्य मुक्त जीवन जी पाता है, संत जीवन स्वार्थ से रहित होता है। स्वार्य में मनुष्य अकरणीय कार्य भी कर बैठता है। यदि आप जीवन में आनंद चाहते हैं, धर्म को प्राप्त करना चाहते है तो 24 घण्टे में एक कार्य ऐसा अवश्य करें जो स्वार्थ से रहित हो, आपका श यह एक कार्य ही आपके पूरे जीवन को संवार लेगा। मानव
03 नवम्बर, सोमवार की प्रातः बेला में आन्चार्य श्री ससंघ रामपुरमनिहारान से पर‌विहार करते हुए ननौता नगर में प्रवेश करेंगे !

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