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पुण्य प्रवाह के निमित से, हैं बनते ऐसे योग, भावी मुनियों को मिला, ‘गुरु योग’ संयोग

इंदौर
_जहाँ पुण्य का प्रवाह होता है, वहीं ऐसे दिव्य योग बनते हैं।_धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि
आगामी 16 दिसंबर 2026 को जयपुर, राजस्थान की पावन धरा पर एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण आने वाला है, जो जिनशासन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। श्रमंण संस्कृति महामहिम पट्टाचार्य भगवंत श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज संसघ के मंगल सान्निध्य में, कुल गौरव परम पूज्य श्रुतसंवेगी महाश्रमण श्री 108 आदित्य सागर जी मुनिराज संसघ के करकमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षा धारण करने जा रहे तीन भावी श्रमण —
बाल ब्रह्मचारी अतिशय भैया जी,*
– बाल ब्रह्मचारी विशाल भैया जी,
– बाल ब्रह्मचारी रोहित भैया जी*
तीनों बालव्रहमचारी भाईयों ने
दीक्षा से पूर्व पुण्यार्जन और गुरु आशीर्वाद की श्रृंखला में कोटा नगर की पावन दादाबाड़ी में विराजमान परम पूज्य विद्याकुल तिलक, निर्यापक श्रमण श्री 108 योग सागर जी मुनिराज संसघ के दर्शनार्थ पहुँचे।
तीनों भावी मुनिराज श्वेत वस्त्रों में, गले में पुष्पमाला धारण कर, हाथ जोड़कर विनयपूर्वक खड़े हैं। साथ में एक और ब्रह्मचारी भाई भी उपस्थित है। सामने तख्त पर विराजमान हैं परम पूज्य निर्यापक श्रमण योग सागर जी महाराज, जो शास्त्रों से घिरे हुए, अपने कर कमलों से इन भावी मुनियों को निहार रहे हैं। यह दृश्य अत्यंत वात्सल्यपूर्ण और मनोहारी है।
तीनों भाइयों ने पूज्य निर्यापक श्रमण जी के चरणों में श्रीफल समर्पित कर उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

पूज्य निर्यापक श्रमण ने दिया वात्सल्यपूर्ण आशीर्वाद —

पूज्य निर्यापक श्रमण ने श्रमण संस्कृति के इन भावी ध्वजवाहकों को प्रसन्नतापूर्वक अपना मंगल आशीर्वाद एवं वात्सल्यपूर्ण स्नेह प्रदान किया।_

उन्होंने कहा — “तुम तीनों का यह वैराग्य भाव उत्तम है। गुरु आदित्य सागर जी के सान्निध्य में तुम्हारी यह दीक्षा जिनशासन की प्रभावना को बढ़ाने वाली होगी। मेरा मंगल आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ है।”

निःसंदेह, यह मिलन केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परम्परा के अटूट बंधन का प्रतीक है। एक ओर विशुद्ध सागर जी और आदित्य सागर जी के पट्टशिष्य बनने जा रहे हैं, तो दूसरी ओर योग सागर जी जैसे तपस्वी मुनिराज का आशीर्वाद — यह दुर्लभौ नं संयोग कई जन्मों के पुण्य से बनता है।
निःसंदेह, 16 दिसंबर 2026 को जयपुर, राजस्थान की पावन धरा पर एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय लिखा जाएगा, जो आने वाली अनेक पीढ़ियों को गौरवान्वित करेगा तथा जिनशासन की प्रभावना और उत्कर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।*
भारत वर्षीय सकल जैन समाज में इस दीक्षा को लेकर अत्यंत उत्साह है।

आयोजक: श्री आदित्य प्रेरणा मंच, जयपुर

निवेदक: सकल दिगंबर जैन समाज, जयपुर, राजस्थान

– राजेश जैन दद्दू
, इंदौर

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