नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026। ऋषभ विहार। ऋषभ विहार, दिल्ली में विराजित परम पूज्य पंचम पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने त्रिदिवसीय “राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी” के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जैनागम को समझने के लिए विभिन्न दृष्टियों को समझना पड़ेगा।
गुरुदेव ने कहा कि दार्शनिक दृष्टि, सिद्धान्त दृष्टि, नय दृष्टि, प्रमाण दृष्टि, शब्दार्थ, आगममार्ग, व्यवहार एवं निश्चय – अनेक दृष्टियों को समझकर ही जैनागम को समझा जा सकता है।
समयसार पर विशेष प्रवचन –
गुरुदेव ने कहा कि समयसार को सगुण्य एवं निर्गुण्य दोनों ही समझ सकते हैं, परन्तु समयसार रूप अनुभूति निर्ग्रन्थ वीतरागी होकर ही कर सकता है।
समयसार (समय पाहुड़) में शुद्ध-समयसार की व्याख्या है, इसमें शुद्धात्मा की शुद्ध चर्चा है। समयसार को सुनना सरल है, पर समयसार स्वरूप की प्राप्ति अत्यन्त कठिन है। भोग शय्या पर समयसार की अनुभूति नहीं होती है। जो समयसार स्वरूप को जानकर, भेदभावना से भोग वृत्ति से दूर हो जाता है, वही आत्मा के परमानन्द को प्राप्त कर पाता है।
जो समय (आत्मा) को जानकर आत्मा में रमण करता है, वही सिद्धत्व को प्राप्त कर पाता है। समय को समझकर, समय पर कार्य करोगे तो समय को प्राप्त कर लोगे। समय पर किया गया कार्य ही सिद्धि को प्रदान करता है। समय की कीमत करना है, उसकी दुनिया कीमत करती है।
त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का शुभारंभ –
ऋषभ विहार, दिल्ली में परम पूज्य गुरुदेव के ससंघ सान्निध्य में 10 अक्टूबर से त्रिदिवसीय विद्वत संगोष्ठी प्रारम्भ हुई।
देशभर से अर्धशतक विद्वानों की सहभागिता –
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से आए अर्धशतक विद्वानों ने सहभागिता की।
प्रमुख रूप से डॉ. पंडित त्रयंबक जी बड़ौत (उ.प्र.), डॉ. पंडित वीर सागर जी दिल्ली, डॉ. प्रो. नलिन के. शास्त्री दिल्ली, डॉ. प्रो. विजय कुमार जी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ. फूलचंद जी ‘प्रेमी’, डॉ. त्रयंबक जी सिंघई जयपुर, डॉ. जयकुमार जी उपाध्ये कर्नाटक, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ. अनेकान्त जैन दिल्ली, डॉ. सोनल जैन दिल्ली, डॉ. सुनील जैन ‘संचय’ ललितपुर, डॉ. नरेन्द्र कुमार जैन शीलमगढ़, डॉ. ज्योति जैन खटोली, डॉ. आराधना जैन ग्वालियर, पत्रकार शरद जैन (महासभा चेतना) दिल्ली, सुप्रसिद्ध वास्तुकार देवेन्द्र कुमार जैन सिंघई इंदौर, पंडित मनीष जी ‘संजयंत’ टीकमगढ़, ब्र. संजय जी ‘सुरसा’ टीकमगढ़, ब्र. प्रतिष्ठाचार्य पीयूष जी ‘प्रखर’, ब्र. पीयूष जी विरिशा, ब्र. मनीष जी आदि उपस्थित रहे।
ऋषभ विहार मंदिर कमेटी द्वारा सभी विद्वानों को सम्मानित किया गया। मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, पुष्प अर्पण, शास्त्र भेंट के उपरांत संगोष्ठी प्रारम्भ हुई। मनीषी विद्वान डॉ. सोनल शास्त्री एवं डॉ. अनेकान्त शास्त्री ने आलेख प्रस्तुत किया।
– राजेश जैन दद्दू, प्रचार प्रमुख, इंदौर

