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शरद ऋतु में माँ दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व -डॉ ज्योति वर्मा

इटावा -नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व साल में 4 बार क्वार यानी शारदीय, चैत्र यानी वासंतिक के अलावा दो गुप्त नवरात्रि- माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक (आमतौर पर जनवरी–फरवरी) माघ गुप्त नवरात्रि तथा आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक (आमतौर पर जून–जुलाई) आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पड़ती है, जिसमें माँ दुर्गा की भक्तिभाव से पूजा अर्चना की जाती है। इन सभी नवरात्रियों में शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख है। शरद ऋतु में आने के कारण इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। जो इस बार 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है।भगवान राम से जुड़ा है महत्व शारदीय नवरात्रि का महत्व भगवान राम और रावण से जुड़ा हुआ है। रावण के साथ अंतिम युद्ध से पहले भगवान राम ने शक्ति की देवी माँ दुर्गा का आह्वान कर पूजा-अर्चना की थी। भगवान राम देवी दुर्गा की आराधना करने के लिए इंतजार नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शरद ऋतु में ही युद्ध से पहले माता दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद उन्हें विजय प्राप्त हुई थी। तभी से इस नवरात्रि को विशेष माना जाने लगा।9 दिनों में 9 रूपों की पूजा – नवरात्रि के 9 दिनों में माँ दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवे दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है। भक्त पूरे 9 दिन व्रत रखकर माँ की आराधना करते हैं।यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मान्यता है कि इन 9 दिनों में माँ दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों के सभी कष्ट हरती हैं। इस दौरान घर-घर में कलश स्थापना, जगराता और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।नवरात्रि के बाद दसवें दिन विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है।
इसलिए शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और इसे बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

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