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इंटर्न डॉक्टरों के संघर्ष और चिकित्सा शिक्षकों के विरोध की बड़ी जीत: सरकार ने स्टायपेंड 50% बढ़ाया, दतिया में भी काली पट्टी बांधकर हुआ था उग्र प्रदर्शन

दतिया।
राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में उठा प्रदेशव्यापी आंदोलन आखिरकार रंग लाया है। प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA) मध्य प्रदेश के आह्वान पर प्रदेश भर के चिकित्सा शिक्षकों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद, राज्य सरकार को झुकना पड़ा है। भारी दबाव के चलते सरकार इंटर्न छात्रों के स्टायपेंड में 50% की वृद्धि करने को मजबूर हुई है। इस ऐतिहासिक आंदोलन में दतिया मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए काली पट्टी बांधकर अपना पूर्ण समर्थन दिया था।
भोपाल में हुई पुलिस बर्बरता का हुआ था कड़ा विरोध
PMTA मध्य प्रदेश के प्रांताध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय और महासचिव डॉ. अशोक ठाकुर द्वारा 8 सितंबर 2026 को प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, मध्य प्रदेश शासन) को एक कड़ा पत्र लिखा गया था। इस पत्र में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न विद्यार्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के उपयोग की सख्त निंदा की गई थी।
एसोसिएशन ने पुलिस की इस कार्रवाई को “प्रदेश के प्रत्येक चिकित्सक पर हमला” करार देते हुए स्पष्ट किया था कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके विरोध स्वरूप 9 सितंबर 2026 को प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों द्वारा काली पट्टी लगाकर कार्य करने का ऐलान किया गया था।
दतिया में भी दिखा असर, शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी
PMTA के इस राज्यव्यापी आह्वान का समर्थन करते हुए दतिया मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी 9 सितंबर को काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। दतिया के चिकित्सा शिक्षकों ने इंटर्न विद्यार्थियों और जूनियर डॉक्टरों (जूडा) को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए स्पष्ट किया कि वे उनके अभिभावक के समान इस संघर्ष की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
दबाव में आई सरकार, आखिरकार मानी मांगें
ज्ञात हो कि जूडा और इंटर्न विद्यार्थियों की मांगों के निराकरण के संबंध में विभाग स्तर पर पिछले 2 माह से कार्रवाई लंबित थी। एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि राज्य शासन संवेदनशीलता के साथ इन मांगों का निराकरण करे और बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों को चिह्नित कर उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करे।
दतिया सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर और अन्य सभी मेडिकल कॉलेजों में एक साथ हुए इस संगठित और शांतिपूर्ण विरोध (काली पट्टी प्रदर्शन) ने सरकार पर भारी दबाव बनाया। इसी एकजुटता के फलस्वरूप सरकार को इंटर्न छात्रों के हित में फैसला लेते हुए उनके स्टायपेंड में 50% की उल्लेखनीय वृद्धि करनी पड़ी। चिकित्सा जगत में इसे एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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