इंदौर। श्रमण संस्कृति के महा श्रमण तीर्थंकर सम उपकारी पूज्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने आज गुरुवार को दलाल बाग छत्रपति नगर में प्रवचन देते हुए प्रेरणास्पद संदेश दिए। प्रस्तुत है उनके संदेशों की बानगी।
०सच्चा धर्म तब है जब क्षमा में आनंद मिलने लगे और अहिंसा स्वभाव बन जाए ।
० धर्म को फुर्सत का काम नहीं बनाना चाहिए। बचा हुआ समय धर्म को देना नहीं है, बल्कि धर्म के लिए समय निकालना है। इसी प्रकार दान भी बची हुई राशि से नहीं, बल्कि अपनी कमाई में से धर्म और समाज के लिए पहले हिस्सा निकालने की भावना से होना चाहिए।
०आज आवश्यकता इस बात की है कि जो लोग और बच्चे मंदिर और पाठशाला तक नहीं आ सकते, उनके घर तक धर्म और संस्कार पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए, ताकि धर्म केवल मंदिर में नहीं, बल्कि घर-घर में ठहर जाय और घर मंदिर बन जाए।
० धर्म को पहचान नहीं,आचरण बनाइए
धर्म को फुर्सत का काम नहीं, प्राथमिकता बनाइए।
भय से बुराई मत रोकिए, स्वभाव बदलकर बुराई छोड़िए।
० धर्म ऐसा करो जो तुम्हारी चेतना में उतर जाए।भगवान की पूजा भगवान के लिए नहीं, अपने आत्मकल्याण के लिए कीजिए।
० दुनिया में एक मात्र जैनो के भगवान ही हैं ऐसे हैं जिन्हें कुछ नहीं चाहिए, हमारे भगवान भिखारी नहीं त्रिलोकी नाथ हैं।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा में चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, आशा रानी पांड्या, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी,शिविर संयोजक-आलोक आकाश कोयला, महामंत्री हर्ष जैन, डॉ जैनेन्द्र जैन संजय पाटोदी, , रंजन जैन, पत्रकार राहुल सेठी, विपुल बाझलं अनसुल शास्त्री, रानी डोसी,
सोनाली बागड़िया आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे धर्म सभा का संचालन आवाज ऋषि अनुराग जैन ने किया।
मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के प्रेरणास्पद संदेश धर्म ऐसा करो जो तुम्हारी चेतना में उतर जाए

