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जैन संतों पर अभद्र टिप्पणी का मामला मेनका गांधी को एक करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस दिया।

इंदौर
पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी द्वारा जैन संस्कृति एवं संतों के परम पवित्र धार्मिक उपकरण पिच्छी (मोरपंख से निर्मित) को लेकर दिए गए एक अत्यंत गैर-जिम्मेदार, भ्रामक, असत्य , मनगढ़ंत और अमर्यादित बयान ने भारत वर्षीय देश-विदेश में निवास करने वाले करोड़ों जैन धर्मावलंबियों की भावनाओं को गहरे रूप से आहत किया है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जैन समाज धार्मिक , संस्कृति की मान्यताओं और अहिंसा के मूल सिद्धांतों के प्रति मेनका गांधी की घोर अज्ञानता को उजागर करने वाले इस बयान के विरोध में भारत वर्षीय जैन समाज ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है।
दद्दू ने बताया कि 23 जून को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) के जैन समाज के प्रतिष्ठित विधिक अधिवक्ता निपुण जैन के माध्यम से भारत वर्षीय सकल दिगंबर जैन समाज, जैन युवा संगठन, विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और श्री णमोकार महामंत्र समिति सहित समाज के गणमान्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं ने मेनका गाँधी को एक विस्तृत 10-पृष्ठीय कानूनी (लीगल) नोटिस प्रेषित किया है।
क्या था मेनका गाँधी का बयान और क्यों है यह उनकी अज्ञानता का प्रमाण- प्रस्तुत विधिक नोटिस के अनुसार, हाल ही में दिगंबर जैन संत आचार्य श्री सौरभ सागर महाराज के दिल्ली प्रवास के दौरान मेनका गाँधी ने जैन मुनिराजों द्वारा प्रयुक्त होने वाले संयम का उपकरण मयूर
पिच्छी के संबंध में सार्वजनिक रूप से यह निंदनीय आरोप लगाया था कि जैन समाज द्वारा लाखों मोरों की हत्या करके उनके पंख प्राप्त किए जाते हैं और उन्हीं पंखों से पिच्छी बनाई जाती है। उन्होंने लगभग 15 लाख मोरों की हत्या का सनसनीखेज और निराधार मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिया था। लेकिन मेनका गांधी का यह वक्तव्य न केवल पूर्णतः असत्य , निराधार और तथ्यहीन है, बल्कि जैन धर्म संस्कृति के प्रति मेनका गाँधी की गंभीर अज्ञानता को भी प्रदर्शित करता है। संपूर्ण विश्व जानता है कि जैन धर्म की आधारशिला अहिंसा परमो धर्मः जियो और जीने दो के सिद्धांत पर टिकी है। जैन साधु-संत सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवों की रक्षा और कल्याण का संकल्प लेकर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि यह सर्वविदित एवं परंपरागत शाश्वत सत्य है कि जैन मुनियों की पिच्छी जिन मोरपंखों से निर्मित होती है, वे मोरपंख मोरों द्वारा प्राकृतिक रूप से समय-समय पर स्वयं झाड़ (शेड) दिए जाते हैं, जिन्हें पवित्र मोरपंख कहा जाता है। जैन धर्म की मान्यताओं में किसी भी
जीव को लेशमात्र भी कष्ट पहुँचाना या उसकी हत्या करना पूर्णतः निषिद्ध है। बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन, विधिक आधार या प्रामाणिक साक्ष्य के बिना ऐसा घिनौना आरोप लगाना केवल भ्रम फैलाने और भारत वर्षीय जैन समाज की सामाजिक धार्मिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। इसलिए समाज जनों द्वारा नोटिस देकर 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस एवं हर्जाना समाज अधिवक्ता निपुण जैन के माध्यम से भेजा गया है इस विधिक नोटिस में मेनका गाँधी को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 15 दिनों के भीतर निम्न मांगों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है, उनमें
नोटिस प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर वे अपने इस असत्य एवं भ्रामक बयान को पूर्णतः और बिना शर्त वापस लें। राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मेंस पर बिना किसी शर्त के सार्वजनिक रूप से लिखित व वीडियो माध्यम से देश की जनता और जैन समाज, एवं जैन साधुओं से माफी मांगें । जैन धर्म, जैन साधु-संतों और समाज के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को असत्य, मनगढ़ंत तथ्यहीन और आधारहीन स्वीकार करते हुए सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करें। समाज द्वारा एक करोड़ रुपये की मानहानि क्षतिपूर्ति जैन समाज की सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक सम्मान और छवि को धूमिल करने के लिए
एवं भारत वर्षीय जैन समाज की अपूरणीय क्षति के लिए एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।
विशेष रूप से, समाज ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि यह क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त होती है, तो इसका उपयोग किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, जीव-दया,मानव सेवा पर्यावरण संरक्षण, पक्षी संरक्षण, अहिंसा प्रचार, गौ-सेवा और धार्मिक-सांस्कृतिक संवर्धन जैसे लोकहितकारी कार्यों में किया जाएगा। आपने अपने कहे कथन पर खेद प्रकट नहीं किया तो होगी कठोर कानूनी कार्रवाई नोटिस में साफ तौर पर आगाह किया गया है कि यदि तय समयावधि (15 दिवस) के भीतर इन मांगों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो मेनका गाँधी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत धार्मिक भावनाओं को आहत करने, विभिन्न वर्गों के मध्य वैमनस्य उत्पन्न करने, मानहानि करने तथा लोकशांति भंग करने की श्रेणी में सक्षम न्यायालय में दीवानी एवं आपराधिक विधिक कार्यवाही संस्थित की जाएगी, जिसके समस्त व्यय और परिणामों के लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगी। इस नोटिस के प्रेषित होने के बाद से संपूर्ण जैन समाज एकजुट है और सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक मेनका गाँधी के इस अज्ञानतापूर्ण व गैर-जिम्मेदाराना रवैये की विश्व जैन समाज तीव्र भर्त्सना कर रहा है।

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