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सामूहिक जैन बाल संस्कार शिविर में सैकड़ों बच्चों ने प्राप्त किया धर्म एवं संस्कारों का ज्ञान

फिरोजाबाद।जैन संस्कृति, धर्म एवं संस्कारों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित 20वें सामूहिक जैन बाल संस्कार शिक्षण शिविर का भव्य एवं गरिमामय समापन समारोह श्री 1008 पद्मप्रभ जिनालय, न्यू तिलक नगर, फिरोजाबाद में संपन्न हुआ। इसके.के.पी.एस. उज्जैन, श्री कुन्दकुन्द स्वाध्याय मंदिर ट्रस्ट एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन, शाखा देवनगर (भिण्ड) के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर ने नगर के विभिन्न क्षेत्रों में धर्म, संस्कार एवं संस्कृति का अलख जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।शिविर के अंतर्गत न्यू तिलक नगर, हनुमान गंज, बड़ा मोहल्ला, रसूलपुर, देव नगर एवं गांधी नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक कक्षाओं, संस्कार शिक्षा, पूजन-विधि प्रशिक्षण, प्रश्नोत्तरी, भक्ति एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों बालक-बालिकाओं, युवाओं एवं अभिभावकों ने सहभागिता कर धर्म एवं संस्कारों का ज्ञान प्राप्त किया।समापन समारोह का शुभारम्भ श्री1008 पद्मप्रभ जिनालय समिति के पदाधिकारियों महेश चन्द्र जैन (आड़त वाले), विमलेश कुमार जैन सिंघई एवं दिनेश चन्द्र जैन (मामा स्वीट्स) द्वारा भगवान के चित्र का अनावरण कर किया गया। तत्पश्चात चन्द्र प्रकाश जैन द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ बालिका आर्या जैन द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
समारोह के मुख्य वक्ता पं. निखिल जैन शास्त्री रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि आज के समय में बच्चों को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा—”धर्म से संस्कार, संस्कार से चरित्र और चरित्र से राष्ट्र का निर्माण होता है।”कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन पं. विपिन जैन शास्त्री द्वारा किया गया।समापन समारोह के अवसर पर शिविर के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही शिविर में सहभागिता करने वाले सभी बालक-बालिकाओं को सांत्वना पुरस्कार एवं उपहार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।इस अवसर पर शिविर के सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी विद्वानों, शिक्षकों, सहयोगकर्ताओं एवं कार्यकर्ताओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।शिविर के सफल संचालन में पं. अंकुर जी शास्त्री, पं. प्रतीक शास्त्री एवं पं. निखिल शास्त्री के मार्गदर्शन के साथ-साथ पं. अर्पित शास्त्री (सागर, मध्यप्रदेश) का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बच्चों को जैन धर्म, संस्कार, पूजन-विधि, नैतिक मूल्य एवं आदर्श जीवन शैली का प्रशिक्षण प्रदान किया।सोनगढ़ (गुजरात) में अध्ययनरत वीर जैन एवं अनंत जैनने भी शिविर सहयोगकर्ता के रूप में बच्चों को धार्मिक एवं संस्कारमय शिक्षा प्रदान कर शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चन्द्र प्रकाश जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि *”यह पाठशाला बच्चों को धर्म एवं संस्कारों का अमूल्य ज्ञान प्रदान करती है, जिससे वे अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाकर स्वयं के साथ-साथ समाज के कल्याण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। संस्कार ही जीवन की वास्तविक पूंजी हैं।”अंत में शिविर संयोजक विमलेश कुमार जैन सिंघई, महेश चन्द्र जैन (पप्पू) एवं दिनेश चन्द्र जैन (मामा स्वीट्स) ने सभी अतिथियों, विद्वानों, शिक्षकों, अभिभावकों, समाजजनों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन, अभिभावक, शिक्षकगण एवं बालक-बालिकाएँ उपस्थित रहे। समापन अवसर पर पूरे परिसर में उत्साह, श्रद्धा एवं धर्मभावना का अद्भुत वातावरण देखने को मिलाl

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