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आचार्यश्री के व्यक्तित्व में 24 तीर्थंकरों के लक्षण दिखाई देते थे- मुनि सुधा सागर महाराज

मेरे गुरु आचार्य विद्यासागर जी महाराज थे हैं और रहेंगे। भले ही वे तीर्थंकर नहीं थे पर वे तीर्थंकर सम उपकारी थे और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व में पूरे 24 तीर्थंकरों के लक्षण दिखाई देते थे। आचार्य श्री अपने लिए नहीं पूरी दुनिया के लिए जिए और उन्होंने सेकडों युवक युवतियों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान कर श्रमण परंपरा को न केवल वृद्धिगत किया बल्कि इस धारणा को भी बदल दिया की पंचम काल में मुनि नहीं होते ।
धर्म समाज प्रचारक एवं मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि उक्त उद्गार शनिवार को श्रमण संस्कृति के महामहिम समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के 59 दीक्षा दिवस पर महाश्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन तीर्थ मक्सी पारसनाथ में एक भीड़ भरी धर्म सभा में व्यक्त किये।
मुनि श्री ने आगे कहा कि कुछ जीवन ऐसे जीवंत होते हैं जिनका कभी मरण नहीं होता वह अमर होते हैं। आचार्य श्री भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं है लेकिन आज भी वह हम सब के हृदय की वेदिका पर विराजमान है और युगों युगों तक हमारी स्मृति में स्मरणीय एवं वंदनीय रहेंगे।
प्रारंभ आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलनअमित कासलीवाल,विजय धुर्रा, आनंद नवीन गोधा, हंसमुख गांधी,
विजय पाटौदी, राहुल
स्पोर्ट्स, भरत मोदी धर्मेंद्र सिनकेम हर्ष जैन एवं पुष्पा कासलीवाल ने किया
श्रीजी की शांतिधारा आकाश कोल एवं अक्षय कासलीवाल ने की, इस अवसर पर आचार्य श्री की सामूहिक पूजन हुई एवं 59 दीपों से सामूहिक आरती की गई। धर्म सभा का संचालन अनुराग जैन ने किया धर्म सभा में बाहुबली पांड्या, डॉ जैनेंद्र जैन, एम के जैन नरेंद्र नायक, राजेश जैन दद्दू, प्रदीप चौधरी विपुल बांझल, अशोक खासगीवाला,मुकेश पाटोदी कीर्ति पांड्या एवं इंदौर, देवास, उज्जैन शाजापुर, गुना आदि आदि शहरों से पधारे सैकड़ो श्रद्धालु गुरु भक्त उपस्थित थे।

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