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सुधा वाणी : कर्म से डरो, कर्म किसी के भी मीत नहीं होते

इंदौर- श्रमण संस्कृति के महाश्रमण मुनिपुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने गुरुवार को देशना मंडप में प्रवचन देते हुए कहा कि दुनिया में सबसे बलवान कोई है तो कर्म है जो ना तो किसी का मीत होता है और ना ही किसी पर दया करता है। पूर्व जन्म के कर्मों के कारण ही आदिनाथ को
7 माह 7 दिन तक आहार की विधि नहीं मिली थी।
भले ही तुम गुरु से भगवान से मत डऱना लेकिन कर्मों से़ जरूर डरना कर्म किसी को नहीं छोड़ते
भारतीय नारी को धन दौलत से ज्यादा संतान (बेटा) प्रिय होता है क्योंकि उससे ही वंश चलेगा वह शादी पत्नी बनने के लिए नहीं मां बनने के लिए करती है शादी भोग विलास का संबंध नहीं है।
जिस प्रकार वंश चलाने के लिए और और धन संपदा सुरक्षित रखने के लिए वारिस की आवश्यकता होती है उसी प्रकार धर्म चलाने के लिए भी वारिस आवश्यक है।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री ने आगे कहा कि अपनी संतान को ऐसे संस्कार देकर जाना कि तुम्हारे बाद भी तुम्हारे परिवार के सदस्यों में धर्म संस्कार जीवित रहें।
सभी लोग यदि यह नियम ले लें कि घर के सभी सदस्य देव दर्शन के बाद ही भोजन करेंगे तो धर्म जीवित रहेगा और तुम्हारे जाने के बाद भी परिवार भी वही करेगा जो तुमने किया है।
धर्म सभा का संचालन अनुराग जैन ने किया। धर्म सभा में आकाश कोल, प्रिंसिपल टोंग्या सपना मनीष गोधा आनंद नवीन गोधा भूपेंद्र जैन, अखिलेश सोधिया, श्रीमती मुक्ता जैन सोनाली बगड़िया आदि उपस्थित थे।

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