इटावा। वक्फ़ इमाम बारगाह में बरसी की मजलिस को रोकने की साजिश के बीच नम ए आला का मंजर देखने को मिला। अज़मत अली इमाम बारगाह को मुतवल्ली के रिश्तेदारों द्वारा प्राइवेट प्रॉपर्टी करार देकर ताला जड़ दिया गया, जिसके चलते मजलिस के लिए फर्श पर बैठना मजबूरी बन गया। शौजव रिजवी, मो. इबाद, अली कैफी हुसैन व नखी रजा ने कहा कि बरसी की मजलिस का आयोजन तय था। आयोजकों ने चार दिन पहले मौखिक सूचना दे दी थी और एक हफ्ते पहले पर्चे भी छपकर बाँट दिए गए थे। लेकिन इसके बावजूद घटिया अज़मत अली इमाम बारगाह का दरवाज़ा नहीं खोला गया। विपरीत परिस्थितियों में भी अकीदतमंदों ने हिम्मत नहीं हारी और इमामबारगाह के बाहर ही फर्श बिछाकर मजलिस का आयोजन करने लगे। इस वक्फ़ इमाम बारगाह की मुतवल्ली शहाना बेगम पत्नी हसीन रज़ा पिछले 35 साल से कानपुर में रह रही हैं, लेकिन यहाँ उनके रिश्तेदार राहत हुसैन पुत्र मज़ाहिर हुसैन व अन्य रिश्तेदार जो उसी इमामबारगाह में रह रहे इस वक्फ़ संपत्ति को अपनी निजी जायदाद बताने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन्हीं रिश्तेदारों के दबाव में इमामबारगाह बंद रखी गई, ताकि मजलिस को नाकाम किया जा सके। पर जब स्थानीय लोगो ने आवाज़ उठायी आस पास के लोग आगये स्थति जब संवेदनशील बनी तो फिर आनन फानन में इमामबारगाह का गेट मजबूरन खोलना पड़ा, बाद में मजलिस इमामबारगाह में संपन्न हुई। तालों के बावजूद मजलिस को बाहर फर्श बिठाकर करने लगे आयोजन। श्रद्धालुओं ने कहा कि ये जुल्म है कि वक्फ़ की संपत्ति पर कब्ज़ा जताने की कोशिश हो रही है, लेकिन हम अपनी मजलिस नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन से माँग की गई है कि इस वक़्फ़ इमाम बारगाह की मुतवल्ली के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिनके रिश्तेदार वक्फ़ कानून को ताक पर रखकर निजी संपत्ति का झूठा दावा कर रहे हैं।
शिया वक्फ़ की इमाम बारगाह में ताला,बाहर फर्श बिछाकर करनी पड़ रही मजलिस

