आत्मा में उतरने पर ही संसार सागर से पार होना संभव है -आचार्य निर्भयसागर

मुरैना (मनोज जैन नायक) दिगम्बर जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मुरैना में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने न केवल अपनी आत्मा का कल्याण किया, बल्कि प्रत्येक जीवात्मा के कल्याण का मार्ग भी बताया। अपनी आत्मा की खोज करने के कारण वे सबसे बड़े वैज्ञानिक कहलाए। भगवान बाहर नहीं, हमारे भीतर ही विराजमान हैं। हमारा परमात्मा हमारे अंदर बैठा है, परंतु हम उसे बाहर खोजते हैं, इसी कारण संसार में भटकते रहते हैं। जैसे जल बाहर खोजने से नहीं, बल्कि भूमि के भीतर खोदने से प्राप्त होता है, उसी प्रकार भगवान की प्राप्ति भी अपने अंतर में उतरकर ही संभव है।
आचार्यश्री ने कहा कि जिस व्यक्ति पर भक्ति का रंग चढ़ जाता है, वह अंतरंग में उतरने की बात करता है। जो अपनी आत्मा में उतर जाता है, वही संसार सागर से पार हो जाता है। आचार्यश्री ने भगवान महावीर के वचनों को स्पष्ट करते हुए कहा— “पहले डूबना सीखो, तब तैरना सीखो”, अर्थात पहले अपने अंतर में उतरना आवश्यक है, तभी संसार से पार होने का मार्ग प्रशस्त होता है।
आचार्यश्री ने त्रिकाल पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि—प्रथम काल की पूजा प्रातःकाल में मंदिर जाकर जिनेन्द्र भगवान की पूजा है । द्वितीय काल की पूजा मध्यकाल में होती है, जब दिगम्बर संतों को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराया जाता है । तृतीय काल की पूजा संध्याकाल में आरती एवं स्वाध्याय के रूप में शास्त्र पूजा है।
पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि घर एक प्रकार से मरघट के समान है, परंतु जब उसमें दिगम्बर मुनि आहार ग्रहण करने आते हैं, तब वही घर मंदिर बन जाता है। जब हम किसी की सेवा और सहयोग करते हैं, तब तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है। संत समाज में आत्मा रूपी वस्त्र को निर्मल करने के लिए धोबी के समान आते हैं।
अपने प्रेरक संदेश में आचार्यश्री ने कहा कि जन्म हमारे भाग्य के अनुसार होता है, परंतु मरण हमारे पुरुषार्थ के अनुसार होना चाहिए। समाधि मरण अगले भव को सुधारने की चाबी है।
त्रिदिवसीय भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव
प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री सिहोनिया द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार नगर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के अवसर पर त्रिदिवसीय महोत्सव 28 मार्च से 30 मार्च तक हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा । शनिवार 28 मार्च को प्रातः श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक शांतिधारा पश्चात आचार्यश्री के मंगल प्रवचन होगें । तत्पश्चात आचार्यश्री विपुलसागर जी महाराज का अवतरण दिवस मनाया जाएगा । शाम 7 बजे श्री जिनवाणी धर्म जागरण यात्रा बड़े जैन मंदिर से कीर्ति स्तंभ पहुंचेगी, वहां पर 48 दीपकों द्वारा भक्तांबर महा अर्चना की जाएगी । रविवार 29 मार्च को प्रातः 05 बजे प्रभात फेरी नगर भ्रमण, 08 बजे महामंत्र णमोकार पाठ, प्रवचन, आचार्य श्री निर्भयसागर आचार्य पदारोहण दिवस एवं भगवान महावीर स्वामी विधान होगा । शाम को इंद्र सभा, माता के सोलह स्वप्न दिखाए जाएंगे । सोमवार 30 मार्च को प्रातः 07 बजे भव्य श्री जी की रथयात्रा, 11 बजे कलषाभिषेक, 12 बजे सामूहिक वात्सल्य भोज एवं शाम को भगवान महावीर स्वामी का पालन झुलाने का कार्यक्रम होगा ।

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