सैफई -गांवों में पौधारोपण को औपचारिकता तक सीमित न रखकर उसे स्थायी हरियाली में बदलने के उद्देश्य से सैफई ग्राम पंचायत में ग्रीन चौपाल का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर आयोजित इस चौपाल में वन विभाग ने ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों को यह स्पष्ट संदेश दिया कि बिना जिम्मेदारी तय किए किया गया पौधारोपण अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकता।
बसरेहर रेंज के वन दरोगा श्रीनिवास पांडेय ने चौपाल के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए बताया कि पौधे लगाने से अधिक जरूरी उनकी सुरक्षा और देखभाल है। उन्होंने कहा कि अक्सर अभियान के तहत पौधे तो लगा दिए जाते हैं, लेकिन बाद में उनकी सिंचाई और निगरानी नहीं होने से वे नष्ट हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में पूरा प्रयास व्यर्थ हो जाता है।
ग्रीन चौपाल में ग्राम पंचायत नगला सुभान के प्रधान सुनील ठाकुर, ग्राम पंचायत गीजा के प्रधान राधा कृष्ण यादव सहित समाजसेवी उपस्थित रहे। वन दरोगा ने बताया कि खाली पड़ी सरकारी भूमि, तालाबों की मेड़, स्कूल परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थान पौधारोपण के लिए उपयुक्त हैं, बशर्ते वहां पानी और सुरक्षा की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।उन्होंने यह भी बताया कि किन स्थानों पर पौधे लगाने से नुकसान की आशंका रहती है और किन लापरवाहियों के कारण पौधे सूख जाते हैं। पशुओं से सुरक्षा, समय पर सिंचाई और नियमित देखरेख को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि हर लगाए गए पौधे के साथ उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
वन दरोगा ने जानकारी दी कि यह अभियान डीएफओ विकास नायक के निर्देशन में एसडीओ विमल कुमार और क्षेत्रीय वन अधिकारी अमित कुमार के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। ग्रीन चौपाल के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को व्यवहारिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने भी अपनी शंकाएं रखीं और सुझाव दिए।
ग्रीन चौपाल में पौधारोपण को लेकर जिम्मेदारी तय करने पर जोर

