अपने मन को धार्मिक आजादी प्रदान करें। मन को स्वच्छंद न बनायें ⇒ भावलिंगी संत आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी मुनिराज
उत्तर प्रदेश खतौली में अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए अपने मन को आज़ाद करना होगा। आप कहोगे कि गुरुदेव मन तो हमारा वैसे ही आजाद है उसे क्या आजादी देनी ? ध्यान रहे, आपका मन आज़ाद नहीं है आपका मन स्वच्छंद है। आपका मन स्वच्छंद है पंचेन्द्रियों के पापवर्धक विषयों में। आपका मन…

