गुरुकृपा और शिष्य समर्पण से अज्ञान का अंधेरा दूर होता है – मुनिश्री विलोकसागर
मुरैना (मनोज जैन नायक) संसार में प्राणी भोग विलास में लिप्त होकर गुरु परम्परा को भूलते जा रहे हैं। भौतिकता की चकाचौंध में लोगों ने गुरुओं का सान्निध्य व सत्संग से दूरी बना ली है । जहाँ कुछ परमेश्वर को ही गुरु मानते हैं, तो कुछ आत्म-ज्ञान या तत्वदर्शी संतों को सच्चा गुरु मानते हैं।…

