Headlines

विधानसभा परिसर में गूंजा क्षमा, अहिंसा और संयम का संदेश – आचार्य श्री समय सागर जी ने पढ़ाया अनुशासन का पाठ

भोपाल, 07 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर का नजारा मंगलवार को बदला-बदला सा था। लोकतंत्र के इस मंदिर में जहाँ सामान्य दिनों में राजनीतिक चर्चाएं, सत्ता-पक्ष और विपक्ष के संवाद गूंजते हैं, वहीं कल वहां धर्म, अहिंसा, क्षमा और करुणा का पावन संदेश गूंज रहा था। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि
दिगंबर जैन समाज द्वारा विधानसभा परिसर में सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव का भव्य आयोजन आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के पावन ससंघ सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम में अनेक श्रद्धालु श्वेत परिधानों एवं महिलाएं केसरिया वस्त्रों में उपस्थित थीं और सभी उपस्थित समाज जन एक-दूसरे से “मिच्छामी दुक्कड़म्” कहकर क्षमा याचना कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेश भर से आए समाज श्रेष्ठी एवं मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्य रहे मौजूद –
इस पावन अवसर पर *मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मंत्री श्री चेतन कश्यप, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, हाउसिंग बोर्ड चेयरमैन श्री ओम जैन, सामाजिक संसद अध्यक्ष पंकज सुपारी महामंत्री श्री राहुल कोठारी रवीन्द्र जैन पत्रकार मनोहर लाल टोंग्या, नरेंद्र टोंग्या विनोद जैन इंजिनियर मनोज जैन एम के प्रमोद हिमांशु महेंद्र जैन डीएसपी सहित प्रदेशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, भजन एवं आचार्य श्री की पुजन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
नवाआचार्य श्री ने कहा – अहिंसा किसी एक का नहीं, विश्व धर्म है –
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म जातिवाद का नहीं, बल्कि वैराग्य, जीवदया और अहिंसा की भावना रखने वाला धर्म है। अहिंसा किसी धर्म या व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि विश्व धर्म है। प्रत्येक जीव सुख और शांति चाहता है और क्षमा धर्म की आराधना के बिना सच्ची सुख-शांति संभव नहीं है।

उन्होंने अपने गुरु, संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा भारत से मांस निर्यात का विरोध किया। बिना करुणा, दया और अनुकंपा के धर्म की आराधना नहीं हो सकती।

आचार्य श्री ने कहा कि रिश्तों में विचारों के अंतर से क्रोध की अग्नि जलती है, जिसे क्षमा रूपी जल से बुझाया जा सकता है। इसके लिए संयम और आत्मानुशासन जरूरी है। भगवान राम, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध और गुरु नानक ने भी अहिंसा को आधार बनाकर विश्व कल्याण की भावना को आगे बढ़ाया।

सहजता लाती है क्षमा – मुख्यमंत्री –
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विधानसभा में आचार्यश्री का आगमन हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार में रहते हुए कई बार लोगों के मन के विरुद्ध भी निर्णय लेना पड़ता है। क्षमा व्यक्ति के अंतर्मन को मजबूत करती है और अहंकार का नाश कर जीवन में सहजता और सरलता लाती है। उन्होंने शासन द्वारा जनकल्याण और लोकहित के लिए किए जा रहे कार्यों और आगामी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, जीवदया और अहिंसा के संकल्प के साथ एक-दूसरे से क्षमा याचना कर महोत्सव का समापन किया।

*- राजेश जैन दद्दू, प्रचार प्रमुख / मीडिया प्रभारी,

Please follow and like us:
Pin Share