इटावा। नारायन कालेज आफ साइंस एण्ड आर्ट्स में पं. दीनदयाल उपाध्याय का जयंती समारोह मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. धर्मेन्द्र शर्मा तथा मुख्य अतिथि दानवीर सिंह एड. चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. धर्मेन्द्र शर्मा ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक महान दार्शनिक, समाजशास्त्री, समाजसेवक, संगठनकर्ता एवं भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे हैं। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद जैसी प्रगतिशील विचार धारा दी। उन्होंने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय नितान्त सरल और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे। राजनीति के अतिरिक्त साहित्य में भी उनकी गहरी अभिरुचि थी। उनके हिन्दी और अग्रेजी के लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओ में प्रकाशित होते रहते थे। केवल एक बैठक में ही उन्होंने चन्द्रगुप्त नाटक लिख डाला था। भारतीय समाज उनके उल्लेखनीय कार्यो के लिए हमेशा ऋणी रहेगा।मुख्य अतिथि दानवीर सिंह ने छात्र/छात्राओं को विधिक जागरूकता के अंतर्गत पाक्सो एक्ट 2012 के संबंध में सम्बोधित किया। उन्होंने बताया कि इस कानून के अंतर्गत 18 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक लड़के व लड़की को नाबालिग माना जाता है। ये कानून लड़के और लड़की पर समान रूप से लागू होता है। ये कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और बाल अपराधों जैसे गम्भीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। ये एक सख्त कानून है जो अपराधी को सजा भी प्रदान करवाता है। इस अवसर पर काॅलेज के सभी शिक्षक-शिक्षिकाए मौजूद रहे।
नारायन कालेज में विधिक जागरूकता शिविर लगाकर दी पास्को एक्ट की जानकारी

