उत्तम मार्दव धर्म पर मान कषाय त्यागने का संदेश, उपासक धर्म संस्कार शिविर में 350 शिविरार्थी शामिल
तिजारा। दसलक्षण महापर्व के अवसर पर देहरा तिजारा में आयोजित धर्मसभा में दिगम्बराचार्य भावलिंगी संत श्री विमर्श सागर जी महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को मान और अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनाने का संदेश दिया।आचार्य श्री ने कहा कि मृदुता का भाव ही उत्तम मार्दव धर्म है। मान कषाय के कारण आत्मा में कठोरता आ जाती है। जिस प्रकार कठोर भूमि पर श्रेष्ठ बीज भी नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार अहंकार से कठोर हुआ मन आत्मिक गुणों के विकास में बाधक बनता है। मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि दसलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का पर्व है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में धर्म के गुणों को धारण कर सकता है।महापर्व के दौरान उपासक धर्म संस्कार शिविर का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें करीब 350 शिविरार्थी भाग ले रहे हैं। शिविर में धर्म, संस्कार और जैन सिद्धांतों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन सहित अमन जैन, शैलू जैन, रवि जैन (पेट्रोल पम्प वाले), नीरज जैन, सुरेंद्र जैन, प्रवीण जैन, टोनी जैन एवं अंशुल जैन सहित समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सोनल जैन की रिपोर्ट

