ग्वालियर। बढ़ती ईंधन खपत, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और पर्यावरण संकट के बीच राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने एक अनोखी पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला स्वयं ई-व्हीकल से कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ बैठक कर बड़ा फैसला लिया। अब विश्वविद्यालय, कॉलेजों और कृषि विज्ञान केंद्रों में सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल फ्राइडे’ लागू रहेगा। इस दिन निजी वाहनों का उपयोग नहीं किया जाएगा, जबकि अन्य दिनों में ई-व्हीकल, सार्वजनिक परिवहन और वाहन शेयरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
ग्वालियर स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित बैठक में कुलपति डॉ. शुक्ला ने कहा कि वर्तमान समय में देश आर्थिक और ऊर्जा संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे दैनिक जीवन में ई-व्हीकल को प्राथमिकता देकर देशहित में अपनी भूमिका निभाएं।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि हर शुक्रवार को विश्वविद्यालय, सभी कॉलेजों और कृषि विज्ञान केंद्रों में निजी वाहनों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा अन्य दिनों में सार्वजनिक परिवहन और वाहन शेयरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिले। विश्वविद्यालय परिसर में आवागमन के लिए भी ई-व्हीकल का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए ई-वाहनों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
तेज गर्मी को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों के हित में एक और अहम निर्णय लिया। अब सभी पांचों कॉलेजों में कक्षाएं सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित होंगी। वहीं अनावश्यक यात्रा और ईंधन की बचत के लिए विश्वविद्यालय एवं कॉलेज स्तर की अधिकांश बैठकें ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी।
डॉ. शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण को लेकर किए गए आवाहन को व्यवहार में उतारना समय की मांग है। यदि समाज का हर व्यक्ति छोटे-छोटे प्रयास करे तो देश को आर्थिक संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे भविष्य की जरूरत बताया। बैठक में अधिष्ठाता कृषि संकाय, निदेशक अनुसंधान सेवाएं व निदेशक शिक्षण एवं छात्र कल्याण सहित सभी कॉलेजों के अधिष्ठाता ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

