सम्यग्दर्शन से मिटते हैं अनंत दुःख, जीवन को मिलती है सही दिशा – आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज

मेरठ मै विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सम्यग्दर्शन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब व्यक्ति को सम्यक दृष्टि प्राप्त हो जाती है, तब उसके जीवन में व्याप्त अनेक प्रकार के भ्रम, मोह और दुःख धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। सम्यग्दर्शन व्यक्ति को सत्य का बोध कराता है और उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संसार में जो भी सुख-दुःख मनुष्य को प्राप्त होते हैं, वे किसी दूसरे व्यक्ति के कारण नहीं, बल्कि उसके अपने कर्मों का फल होते हैं। उदाहरण स्वरूप राम और सीता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सीता के जीवन में जो कष्ट आए, वे किसी के द्वारा दिए गए नहीं थे, बल्कि उनके स्वयं के कर्मों का परिणाम थे। राम केवल निमित्त बने थे। इस प्रकार प्रत्येक जीव अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त करता है। उन्होंने आगे कहा कि सम्यग्दर्शन प्राप्त होने पर अज्ञान और मोह का नाश होने लगता है। अज्ञान के कारण ही जीव अनेक प्रकार के दुखों में उलझा रहता है, लेकिन जब सम्यक दृष्टि जागृत होती है, तब अनंत दुःखों के कारण बनने वाले भ्रम स्वतः समाप्त हो जाते हैं और जीवन में शांति का मार्ग प्रशस्त होता है। आचार्य श्री ने धार्मिक शास्त्रों के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चा शास्त्र वही है जिसमें केवल अच्छी-अच्छी बातें ही नहीं होतीं, बल्कि जीवन की अच्छाई-बुराई दोनों का यथार्थ चित्रण भी होता है। ऐसे शास्त्र मनुष्य को सत्य और असत्य का विवेक प्रदान करते हैं तथा उसे संतुलित और सदाचारी जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सम्यग्दर्शन के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं और धर्ममार्ग पर चलकर आत्मिक उन्नति का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सम्यक दृष्टि का अनुसरण करने से व्यक्ति का जीवन मंगलमय बनता है और समाज में शांति, सद्भाव तथा नैतिक मूल्यों की स्थापना होती है।

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