जयपुर | दिनांक : 6/2/26
झांकृति जयपुर घराने की एक दूरदर्शन-ग्रेड प्राप्त कथक कलाकार हैं तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध कथक गुरु डॉ. शशि सांखला जी की शिष्या हैं।
झंकृति भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की सीनियर स्कॉलरशिप पुरस्कार प्राप्त कलाकार हैं और यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय नृत्य परिषद (International Dance Council) की नामांकित सदस्य भी रह चुकी हैं। उन्होंने संगीत नाटक अकादमी, संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, हंगरी के विदेश मामलों एवं व्यापार मंत्रालय, श्रुति मंडल के उदय शंकर बैले फेस्टिवल सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं।
झंकृति को वर्ष 2022 में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए किए गए अपने कार्य एवं प्रस्तुतियों के लिए समर्थ्य सेवा संस्थान द्वारा “समर्थ्य ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड” से सम्मानित किया गया।
झंकृति ने मात्र 8 वर्ष की आयु से कथक का प्रशिक्षण प्रारंभ किया और राजस्थान विश्वविद्यालय से कथक में स्नातक एवं द्विस्नातकोत्तर (डबल मास्टर्स) की उपाधि प्राप्त की। वे राजस्थान विश्वविद्यालय से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक से भी सम्मानित हैं। वर्तमान में वे राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में प्रो. वंदना कला के निर्देशन में कथक विषय में पीएचडी शोधार्थी हैं।
इस अवसर पर झंकृति ने जयपुर घराने की पारंपरिक बंदिशों के साथ, ताल तीनताल में ‘शुद्ध कथक’ की प्रस्तुति दी ।
इसके पश्चात ठुमरी – ‘मोहे छेड़ो ना, नंद के सुनो’, जो राग कलावती एवं आदीताल में निबद्ध है, प्रस्तुत की । यह रचना राधा के दृष्टिकोण से गाई गई है और श्रीकृष्ण एवं राधा के मधुर छेड़-छाड़ (छेड़-छाड़) को दर्शाती है। श्रृंगार रस से परिपूर्ण यह ठुमरी दर्शकों को वृंदावन की उन रसमयी लीलाओं की स्मृति में ले गयी , जहाँ राधा और कृष्ण एक साथ इन बाल-लीलाओं का आनंद लिया करते थेl

