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अयोध्या से हुआ जैन एकता का शंखनाद, 40 जातीय संगठनों का राष्ट्रीय समागम

अयोध्या। भगवान श्रीराम एवं जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमियों की पावन परंपरा से समृद्ध अयोध्या मे हाल ही में आयोजित दिo जैन सर्वजातीय राष्ट्रीय सम्मेलन जैन समाज की एकता, संगठन और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया। गणिनी प्रमुख
पूज्य आर्यिका ज्ञानमती माताजी के 93वें जन्मोत्सव एवं 75वें संयम दिवस के अवसर परआयोजित त्रिदिवसीय महोत्सव के अंतर्गत हुए इस सम्मेलन में देशभर के लगभग 40 जातीय संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एक हजार से अधिक समाजबंधुओं ने सहभागिता की। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य जातीय संगठनों को सशक्त बनाते हुए संपूर्ण जैन समाज को एकता के सूत्र में पिरोना एवं अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना एवंसामाजिक गतिविधियों से दूर हो गए समाजबंधुओं को पुनः जोड़ना रहा
इस अवसर पर पूज्य
गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि प्रत्येक जाति को अपने संगठन को सशक्त बनाना चाहिए। संगठन मजबूत होंगे, तभी अपनी पहचान, परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकेगी।
महासंघ के राष्ट्रीय
अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीद्र कीर्ति स्वामीजी ने कहा कि जातीय स्तर पर हमारी अलग-अलग पहचान हो सकती है, लेकिन संगठन और उद्देश्य की दृष्टि से हम सभी एक हैं। और जैन धर्म की पहचान भी एक है। यही सर्वजातीय एकता का वास्तविक आधार है।
हसमुख गांधी और कार्यकर्ताओं का समन्वय सराहनीय
सम्मेलन के मीडिया प्रभारी राजेंद्र जैन महावीर ने बताया कि इस आयोजन को व्यापक स्वरूप देने में राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के मार्गदर्शन के साथ महासंघ के महामंत्री के रूप मेंश्री हसमुख जैन गांधी, इंदौर एवं डॉ. जीवन प्रकाश जैन का समन्वयक के रूप में महनीय योगदान रहा‌।
सम्मेलन में जैन समाज से दूर हो गए समुदायों, विशेषकर सराक समाज सहित अन्य समाजबंधुओं को पुनः जोड़ने की आवश्यकता रेखांकित की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी संख्या के साथ-साथ उसकी एकजुटता और सांस्कृतिक जुड़ाव में निहित है। ऐसे समुदायों के इतिहास, परंपराओं और धार्मिक विरासत का तथ्यपरक अध्ययन कर उनसे संवाद स्थापित किया जाना चाहिए। नई पीढ़ी को जैन साहित्य, तीर्थंकरों के संदेश और सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने के साथ उन्हें सामाजिक गतिविधियों में सम्मानजनक भागीदारी देना आवश्यक है।
जनगणना-2027 में धर्म के कॉलम में ‘जैन’ लिखवाने का आह्वान

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पक्ष आगामी जनगणना -2027 में जैन समाज की धार्मिक पहचान को स्पष्ट रूप से दर्ज कराने की आवश्यकता महसूस की गई। जनगणना-2011 में देश की जैन आबादी 44,51,753 दर्ज की गई थी, जबकि प्रतिनिधियों का मानना था कि जैन परंपरा से जुड़े लोगों की वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। समाजबंधुओं से अपील की गई कि जनगणना के दौरान धर्म संबंधी जानकारी देते समय, जिनकी धार्मिक पहचान जैन है, वे धर्म के कॉलम में स्पष्ट रूप से ‘जैन’ दर्ज कराएं ‌।
धर्म समाज प्रचारक
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सम्मेलन में श्री सत्येन्द्र जैन (जैनम् फाउंडेशन, दिल्ली), श्री रमेश तिजारिया एवं श्री पवन कुमार राणा (भारतवर्षीय दिगम्बर जैन अग्रवाल महासभा), श्री जैनेंद्र सांवला, श्री सुरेश हरसोरा एवं श्री नरेंद्र जैन (समग्र दिगम्बर जैन बघेरवाल सामाजिक संस्था), पूज्य जिनसेन भट्टारक स्वामी जी एवं श्री डी.ए. पाटिल (दिगम्बर जैन समाज चतुर्थ दक्षिण), डॉ. रोनिल अहाले एवं श्री चंद्रशेखर कांधे (दिगम्बर जैन धाकड़ लाड जैन समाज, महाराष्ट्र), श्री शैलेंद्र जैन एवं श्री शरद जैन (अखिल भारतीय गंगेरवाल जैन सभा), श्री शांतिलाल जैन एवं श्री बाहुबली जैन (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन गोलालारिय महासभा), श्री अनिल जैन एवं श्री अजय जैन (भारतवर्षीय दिगम्बर गोलालारे जैन समाज सेवा न्यास), श्री संतोष जैन बेटरी, श्री श्रेयांश जैन, श्री डी.के. जैन एवं डॉ. भरत शास्त्री (अखिल भारतीय गोलापूर्व महासभा), श्री रवि सेन जैन एवं श्री विजय सी. जैन (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन गोल श्रेणीय महासभा), श्री विपिन गांधी एवं श्री महेंद्र बंडी (फेडरेशन ऑफ हुमड़ जैन समाज), श्री प्रकाश चंद्र जैन एवं श्री अर्पित जैन वाणी (जेसवाल मालवा), श्री प्रदीप जैन, श्री पवन जैन (आईपीएस) एवं श्री कमलेश जैन (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन जेसवाल उपरोचिया सेवा न्यास), श्री मनोज प्रधान एवं श्री सौरभ जैन (दिगम्बर जैन भारतवर्षीय उपरोचिया जेसवाल परिषद), श्री सुबोध जैन एवं श्री सुबोध कुमार जैन (अखिल भारतीय जेसवाल जैन महासभा), श्री पोपटलाल महादेव दोरले एवं श्री अजित मोहिरे (दिगम्बर जैन कासार समाज संस्था), श्री मिलिंद यंबल एवं श्री रत्नाकर महाजन (काम्बोज समाज), श्री प्रकाश चंद्र बड़जात्या एवं श्री गजेंद्र पाटनी (भारतवर्षीय खंडेलवाल दिगम्बर जैन महासभा), श्री शैलेन्द्र जैन एवं श्री ऋतुराज जैन (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन कठनेरा परिषद), श्री संजय जैन मूंगावली (दिगम्बर जैन कठनेरा महासभा), श्री देवेंद्र जैन एवं श्री सनत जैन (दिगम्बर जैन खरोआ महासमिति), श्री हृदय मोहन जैन, श्री अमरकांत रूपरिया एवं श्री सुधीर सिंघई (दिगम्बर जैन लमेचू समाज), श्री महावीर कुनावत (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन दसा नरसिंहपुरा संस्थान), श्री हरीश चंद्र एवं श्री नरेंद्र जैन उमंग (दिगम्बर जैन पद्मावती पोरवाल महासभा), श्री मुकेश जैन एवं श्री सुशील जैन (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन पद्मावती पोरवाल पंचायत), श्री राजीव रतन जैन (अखिल भारतीय पालीवाल जैन महासभा), श्री सुदर्शन जटाले (अखिल भारतीय पोरवाड़ समाज), डॉ. निर्मल कुमार जैन मंडल (गंगासागर पौंड्रा जैन तीर्थक्षेत्र उन्नयन समिति), श्री कार्तिक जैन एवं श्री अशोक जैन (अखिल भारतीय तारण तरण दिगम्बर जैन महासभा न्यास), श्री दिलीप घेवारे एवं श्री नितिन नखाते (अखिल दिगम्बर जैन सेतवाल संस्था), श्री जीतेन्द्र जैन (प्राच्य दिगम्बर जैन सराक श्रमण समिति) श्री अनिल जैनको एवं श्री सुदीप जैन(दिगंबर जैन परवार समाज), धर्मचंद जैन (अखिल भारतीय दिगम्बर जैन बैरागी समाज) सहित अनेक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे

सम्मेलन मैं उपस्थित सभी प्रतिनिधियों की राय थी कि यह पहल जैन समाज की संगठनात्मक शक्ति को नई दिशा देने वाली है आवश्यकता है कि अयोध्या में उठा एकता का यह स्वर देशभर में पहुंचे। जातीय संगठनों के बीच नियमित संवाद हो, युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जाए, सराक समाज सहित बिछड़े समाजबंधुओं तक पहुंच बनाई जाए और जनगणना-2027 को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।

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