जसवंतनगर। ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव के अंतर्गत शनिवार देर शाम रामलीला मैदान में अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने शिवपाल सिंह यादव का विशाल पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया।अपने संबोधन में शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जसवंतनगर की जनता से उनका विशेष लगाव रहा है। यही कारण है कि वह यहां के आयोजनों में निरंतर शामिल होते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में लूट और अन्याय का माहौल है तथा निर्दोष लोगों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने आजम खान की रिहाई के बाद दोबारा गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए सरकार पर जाति विशेष को निशाना बनाने का आरोप लगाया।मां शारदे की वंदना के साथ कवि सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी ओजस्वी, हास्य, व्यंग्य, प्रेम और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।कवि हिमांशु बाबरा ने अपनी पंक्तियों से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया”लोग तो लोग हैं, लोगों की तरह देखते हैं,एक हम उस बच्चे की तरह देखते हैं।”पलवल से आए कवि विष्णु विराट ने समसामयिक परिस्थितियों पर व्यंग्य करते हुए कहा”जुगनुओं ने शराब पी ली, अब ये सूरज को गालियां देंगे।”कवि बिलाल सहारनपुरी ने सामाजिक एकता का संदेश देते हुए सुनाया”पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था,बाद में हिंदू-मुसलमान हुआ करता था।”प्रसिद्ध गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने प्रेम, रिश्तों और जीवन की संवेदनाओं को अपनी सुरीली आवाज में प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। उनकी पंक्तियां—
“जो हाथ थाम लो, वो फिर न हटने पाए,प्यार की दौलत को कोई न लूटने पाए।जब भी छू लो बुलंदियों को ध्यान ये रखना,जमीं से पांव का रिश्ता न टूटने पाए।”इसके साथ ही उन्होंने “तुम मेरी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें” और रेत पर नाम लिखने से जुड़ी अपनी चर्चित पंक्तियों से भी श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।कवि कुमार मनोज ने व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों पर चोट करते हुए कहा”लहू खामोश है, होठों पे ताला डाल सका है,ये किस सांचे में खुद को आदमी ने ढाल रखा है।”वीर रस के कवि मयंक विधोलिया ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से माहौल में जोश भर दिया। उन्होंने सोमनाथ मंदिर और रामलला से जुड़ी पंक्तियां सुनाते हुए कहा”आपकी काली करतूतों से हर हिंदू का दिल टूटा है,गजनी ने लूटा सोमनाथ को, तुमने रामलला को लूटा है।”अपने काव्य पाठ के दौरान उन्होंने शिवपाल सिंह यादव की भी जमकर प्रशंसा की।अलीगढ़ से आईं कवयित्री मुमताज नसीम ने प्रेम और विरह की भावनाओं को अपनी रचनाओं में पिरोते हुए सुनाया—”कई साल बाद मिले हो तुम, कहां खो गए थे जवाब दो,मेरे आंसुओं को न पोंछो तुम, मेरे आंसुओं का हिसाब दो।”उज्जैन से आए हास्य कवि दिनेश देशी घी ने अपने अनूठे अंदाज और हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वहीं कवयित्री प्रीति पांडे ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत करते हुए भारत की सांस्कृतिक एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान को अभिव्यक्त किया”बखान करूं क्या भारत मां का, गुणगान करूं क्या भारत मां का,मेरी भारत मां की माटी का अंदाज ही निराला है,हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबको अपने आंचल में पाला है।”उन्होंने अपनी एक अन्य रचना में कहा—”मन की सरहद में घूम लेती हूं,इन हवाओं में झूम लेती हूं,याद जब भी तुम्हारी आती है,मैं तिरंगे को चूम लेती हूं।”कवियों की शानदार प्रस्तुतियों पर रामलीला मैदान बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, वीर रस और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम ने आयोजन को यादगार बना दिया।कवि सम्मेलन का संचालन कवि कुमार मनोज द्वारा जोशीले अंदाज मे किया गया इस अवसर पर रामलीला समिति के ठाकुर अजय सिंह गौर, राजीव गुप्ता (बबलू), राहुल गुप्ता, प्रोफेसर बृजेश यादव, विश्वनाथ प्रताप सिंह, सोनू, जिला सचिव जितेंद्र यादव, मोना, सुभाष गुप्ता सहित समाजवादी पार्टी के अनेक पदाधिकारी, क्षेत्रीय नेता एवं बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
शिवपाल सिंह यादव ने किया अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ, कवियों की रचनाओं पर देर रात तक गूंजती रही तालियां

